शिक्षा का बाजारीकरण रोकने के लिए हाल ही में सीएम ने निजी स्कूलों में मनमानी फीस के साथ कॉपी-किताबों और ड्रेस पर मनमानी रोकने के विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी के बाद से अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। दूसरी ओर, सीएम के फरमान की जानकारी होने के बाद स्कूल प्रबंधन की मुसीबतें बढ़ गईं हैं।
यूपी में निजी स्कूलों में मनमानी रोकने के लिए योगी सरकार ने शुल्क निर्धारण अध्यादेश को मंजूरी दी है। इसके बाद से ही स्कूल प्रबंधन की मुसीबतें बढ़ गईं हैं। शिक्षा का बाजारीकरण करने वाली संस्थाएं अब स्कूल की फीस में बदलाव को लेकर असमंजस में हैं। हालांकि, अभी तक बढ़ाई गई फीस ही अभिभावकों से वसूल की जा रही है तथा अब कैश, ट्रांसफर या अन्य सुविधाओं के बदले कैश जमा करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। सीएम के इस आदेश से अभिभावकों ने इस निर्णय का स्वागत किया है पर शिक्षा को व्यापार के तर्ज पर संचालित करने वालीं संस्थाएं अब दलीलें देने में लगीं हैं।
स्कूलों में इस आदेश का डर कहीं नजर नहीं आया। स्कूलों में बच्चों को प्रवेश दिलाने पहुंच रहे अभिभावकों को प्रवेश शुल्क पिछले साल के मुकाबले बढ़ाकर बताया जा रहा है। पास हो चुके हर क्लास के बच्चों से स्कूल प्रबंधन प्रवेश शुल्क वसूल रहा है। दुकानों पर भी स्कूल प्रबंधन की ओर से थमाए गए पर्चे को लेकर उसी दुकानदार के पास पहुंच रहे हैं।