अब तो सोचिए हुजूर, खतरों भरा सफर करने को मजबूर हैं मजदूर
झांसी। लॉकडाउन में महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश से मजदूर व कामगारों के आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। हजारों रुपये देकर मजदूर ट्रक में भूसे की तरह भरकर भूखे प्यासे सफर करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। मंगलवार को करीब दस हाजार लोग रक्सा बॉर्डर पर ट्रक, कार, ऑटो, बाइक, साइकिल व पैदल आए। वाहन सवारों के नाम व अन्य जानकारी एकत्रित कर आगे के लिए जाने दिया गया। जबकि पैदल लोगों को बसों में बिठाकर आगे के लिए रवाना किया गया। जिनको उत्तर प्रदेश के ही दूसरे जिलों में जाना था उनको तो बस मिल गई। जबकि मध्य प्रदेश के दूसरे जिलों में जा रहे लोगों को पैदल ही अपना सफर जारी रखना पड़ा।
महाराष्ट्र के इगतपुरी से 1500 किलोमीटर का सफर तय करने साइकिल से निकले झारखंड के पलामु में रहने वाले अर्जुन सिंह ने बताया कि वे सिक्स लेन पर काम कर रहे थे। लॉकडाउन में कंपनी ने काम बंद कर रखा है। काम कब शुरू होगा? इस बात का भी पता नहीं है। मजबूरन हम 13 लोग अलग- अलग साइकिलों से अपने घर जा रहे हैं। रास्ते में जो भी मुफ्त मिल जाता है उसे खा लेते हैं। अन्यथा पानी पीकर भी वक्त गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ता है। तीन दिन में साइकिल चलाकर यहां तक आए हैं। ऐसा की दर्द उन्नाव के खैराली निवासी राजकुमार का था। वे तीन बच्चों व पत्नी मीना के साथ पैदल पुणे से आ रहे थे। वे पुणे में एक कारखाने में काम करते हैं। जब खाने के लाले पड़ने लगे तो पैदल ही घर वापसी के लिए निकल पड़े। वे सात मई को पुणे से निकले थे। महाराष्ट्र के भिमंडी से गोरखपुर ट्रक में बैठकर जा रहे राजेश सिंह ने बताया कि गाड़ी में 50 लोग बैठे हैं। सभी से दो- दो हजार रुपये किराया लिया गया है। ट्रक के अंदर पल- पल गुजाराना भारी पड़ता है।
हम साइकिल से 13 लोग इगतपुरी से झारखंड जा रहे हैं। सभी साइकिल चलाते- चलाते बुरी तरह थक गए हैं। भूख प्यास से बुरा हाल रहता है। अभी आठ सौ किलोमीटर का सफर तय हुआ है।
वचनदेव कुमार यादव।
मुंबई से बस्ती जाने के लिए ट्रक में बैठने के ढाई हजार रुपये दिए हैं। ट्रक जगह- जगह जांच के लिए खड़ा हो जाता है। ऐसे में धूप और गर्मी में एक- एक मिनट गुजारना मुश्किल हो जाता है।
सुशीला।
मैं मुंबई के कुर्ला में ऑटो चलाता हूं। मुंबई में सब बंद चल रहा है। इसलिए मजबूरन ऑटो से ही परिवार को लेकर समस्तीपुर जा रहा हूं। बस ये लग रहा है कि किसी तरह घर पहुंच जाऊं।
चंदन साहू।
मैं और मेरा पति मुंबई के थाणे में मजदूरी करते हैं। जब खाने को नहीं बचा तो पैदल ही बच्चों के साथ अपने गांव झारखंड जा रही हूं। पैरों में छाले पड़ गए हैं। चलना मुश्किल हो रहा है।
आशादेवी।
मैं मुंबई में ट्रक चलाता हूं। मुंबई में काम बचा नहीं है। किसी तरह से वहां से निकलकर अब फैजाबाद अपने घर जा रहा हूं। ट्रक में बैठने के दो हजार रुपये लिए गए हैं।
मारूफ खान।
पुणे की कंपनी में काम करता हूं। कंपनी ने कहा अभी एक साल काम नहीं मिलेगा। मजबूरन साइकिल से बाराबंकी अपने घर जा रहा हूं।
कुलदीप।
धूप व गर्मी से रहता है बुरा हाल
उत्तर प्रदेश में वाहेनों के प्रवेश करते समय रक्सा बॉर्डर पर उनको रोका जा रहा है। यहां चलने वाली पुलिस प्रक्रिया के कारण घंटों लोग फंसे रहते हैं। ऐसे में लोगों का गर्मी व धूप से बुरा हाल रहता है।
भोजन की कर रखी है व्यवस्था
आरएसएस व भाजपा कार्यकर्ताओं ने रक्सा बॉर्डर पर पिछले पांच दिन से खाना बनवाने का इंतजाम कर रखा है। मंडल अध्यक्ष अरविंद सिंह राजपूत के नेतृत्व में भोजन तैयार करवाया जा रहा है।