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कोरोना काल में 300 फीसदी बढ़ी आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री, 100 देशों ने मंगाया काढ़ा

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केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान के नव निर्मित भवन का लोकार्पण के मौके पर राष्ट्रीय मानक औषध ?
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झांसी। आयुष राज्यमंत्री श्रीपद नाईक ने कहा कि कोविड की कोई दवा नहीं थी, ऐसे में काफी हद तक इसे आयुर्वेद के जरिए नियंत्रित किया जा सका। इसी कारण, कोरोना काल में आयुर्वेदिक दवाओं की मांग 300 फीसदी बढ़ी है। 100 देशों ने भारत से काढ़ा समेत प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले आयुष पदार्थ मंगवाए हैं। इसमें प्रगतिशील ही नहीं, कई विकसित देश भी शामिल हैं। आगे आने वाले समय में आयुर्वेद की मांग और बढ़ेगी। यह बात उन्होंने केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान में आयुर्वेद फार्मेसी एवं औषधि परीक्षण लैब और राष्ट्रीय औषध मानक संग्रहालय के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण के दौरान कही।
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आयुष राज्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद की बढ़ती मांग को मद्देनजर रखते हुए औषधियों के रोपण की व्यवस्था बड़े पैमाने पर की जा रही है। नेशनल प्लांट बोर्ड के अधिकारी इस दिशा में काम कर रहे हैं। हालांकि, अभी भी दवाएं बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में मैटेरियल उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय की तरफ से कई अहम कदम उठाए गए हैं। आज मंत्रालय के पास दो लाख वनस्पति का रिकॉर्ड उपलब्ध है। ईटानगर और गुवाहाटी स्थित आयुर्वेदिक अनुसंधान संस्थान में नए भवन की स्वीकृति मिल गई है। इसके अलावा उत्तर पूर्व क्षेत्र में दो नए केंद्र स्थापित किए गए हैं। कहा कि झांसी के केंद्रीय आयुर्वेदिक अनुसंधान संस्थान में औषधियों पर शोध होगा और दवाइयां तैयार होंगी।
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