झांसी। बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज से बीएएमएस की पढ़ाई करने की आस लगाए छात्र-छात्राओं को बड़ा झटका लगा है। कई विभागों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से नेशनल काउंसिल फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) ने कॉलेज की मान्यता निरस्त कर दी है। अब बीएएमएस प्रथम वर्ष में इस साल प्रवेश नहीं हो पाएंगे।
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में रचना शरीर, क्रिया शरीर, शल्यतंत्र, अगद तंत्र, प्रसूति तंत्र समेत 14 विभाग हैं। हर साल 75 सीटों पर प्रवेश होते हैं। एनसीआईएसएम के मानक अनुसार काय चिकित्सा और मौलिक सिद्धांत विभाग में दो-दो प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर चाहिए। जबकि, अन्य 12 विभागों में एक प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर और एक असिस्टेंट प्रोफेसर की जरूरत है। मौजूदा समय में आयुर्वेदिक कॉलेज के कई विभागों में मानक से ज्यादा शिक्षक हैं तो कइयों में सीटें खाली पड़ी हैं। इसी साल अगस्त में एनसीआईएसएम की टीम ने ऑनलाइन ही कॉलेज में तैनात शिक्षक, पुस्तकालय में किताबों की संख्या व अन्य सुविधाओं का जायजा लिया था। टीम को संस्कृत, क्रिया शरीर, द्रव्य गुण, अगद तंत्र विभाग में सहायक आचार्य और काय चिकित्सा, प्रसूति तंत्र विभाग में आचार्य अथवा सह आचार्य की कमी मिली। इस वजह से कॉलेज की इस साल की मान्यता निरस्त कर दी गई है। चूंकि, आयुर्वेदिक कॉलेज में प्रति वर्ष सामान्य छात्र-छात्राओं की फीस 14 हजार और ओबीसी व एससी छात्रों की नौ हजार है। जबकि, निजी कॉलेज दो से तीन लाख रुपये फीस लेते हैं। इसलिए छात्रों को जोर सरकारी कॉलेज में ही प्रवेश पाने का होता है। मान्यता निरस्त होना छात्र-छात्राओं के लिए बड़ा झटका है।
पांचवीं बार नहीं मिली मान्यता
हर साल आयुर्वेदिक कॉलेज की मान्यता पर संकट के बादल छाए रहते हैं। बीते एक दशक में पांचवीं बार कॉलेज की मान्यता निरस्त हुई है। बताया जाता है 2013 से 2015 तक कॉलेज को मान्यता नहीं मिली थी। इसके बाद 2016 में प्रवेश हुए। फिर 2017 में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद 2018 से 2021 तक कॉलेज के पास मान्यता थी।
साक्षात्कार हुए पर नहीं निकला रिजल्ट
झांसी समेत प्रदेश भर के आयुर्वेदिक कॉलेजों में शिक्षकों के रिक्त पदों का ब्योरा मांगने के बाद जुलाई में लखनऊ में साक्षात्कार हुए थे। किन्हीं कारणों से इनका रिजल्ट अब तक नहीं निकल पाया है। बताया गया कि यदि रिजल्ट जारी हो जाता तो झांसी को भी कुछ शिक्षक मिलने की उम्मीद थी। फिर कॉलेज को इस साल भी मान्यता मिल जाती।
वर्जन..
एनसीआईएसएम ने कुछ विभागों में शिक्षकों की कमी के चलते इस साल कॉलेज को मान्यता नहीं दी है। हालांकि, शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए दिसंबर तक का समय दिया गया है। - डॉ. रवि प्रकाश, प्राचार्य, बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज।