जल्द ही रेलवे की जमीनों और स्टेशनों के आसपास कब्जा करना मुश्किल होगा, क्योंकि रेलवे अपनी संपत्तियों की निगरानी सैटेलाइट के जरिए करेगा। इसके लिए रेलवे और इसरो के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर भी हो चुके हैं। जिसे अंतिम देने के लिए रेलवे को डाटा संकल्प तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत झांसी मंडल भी अपनी संपत्तियों का ब्यौरा तैयार करने में जुट गया है।
अब आसमान से रेलवे की संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा की जाएगी। सेटेलाइट के जरिये रेलवे की संपत्ति और स्टेशन के इर्द गिर्द अतिक्रमण करने वालों पर भी पैनी नजर रखी जाएगी। रेलवे और इसरो के बीच करार हुआ है। इसके बाद से सभी रेल मंडलों से अपनी अपनी संपत्ति का ब्यौरा जुटाने को कहा गया है। झांसी मंडल भी संपत्तियों का डाटा तैयार किया जाने लगा है। मंडल में भी कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। जहां से मुख्य कंट्रोल रूम को संपत्ति की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद मैपिंग के जरिये सेटेलाइट में चिंहित स्थानों को फीड किया जाएगा। इसके बाद रेलवे की सभी संपत्तियों पर आसानी से नजर रखी जाएगी। अब तक रेलवे की तमाम संपत्तियों पर लोगों ने कब्जा कर लिया है, जिसके कई मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं।
अफसरों के मुताबिक रेलवे की सभी संपत्तियों का खाका तैयार किए जाने के बाद जीआईएस पोर्टल विकसित किया जाएगा। यह पूरी तरह से जीपीएस प्रणाली पर आधारित होगा। इसका कार्य तेजी के साथ चल रहा है। प्रगति के लिहाज से कार्य सन 2018 दिसंबर तक पूरा होने की संभावना है। इसके लिए सीआरआइएस (सेंटर फॉर रेलवे इनफार्मेशन सिस्टम) एप्लीकेशन तैयार करने में लगा है।
मंडल की जमीन पर कब्जे
झांसी मंडल की अधिकांश जमीनों पर कब्जे हैं, जिनको आज तक रेलवे कब्जामुक्त नहीं करा सकी। कई मामले तो अदालत में भी विचाराधीन है। इसके अलावा, दिन प्रतिदिन कब्जे भी बढ़ने लगे हैं।
निगरानी तंत्र होगा मजबूत
भारतीय रेलवे ने संपत्तियों की निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं। बताए गए मैपिंग के हिसाब से सैलेलाइट में चिन्हित स्थान अपलोड होगा। जिससे 24 घंटे उन पर नजर रखी जाएगी। इसमें रेलवे स्टेशन भी शामिल हैं। वहीं इसके अलावा ट्रैकों पर भी नजर रखेंगे, ताकि ट्रैक और सिग्नल उपकरणों की खामी को पकड़ा जा सके।
ट्रैकों के काम भी ऑनलाइन
ट्रैकों के काम भी ऑनलाइन दिखेंगे, इससे सेंट्रल रेलवे को यह भी जानकारी मिलेगी कि कहां निर्माण या मरम्मत का काम चल रहा है। रेलवे के मुताबिक पूरी तैयारियों के बाद ही इसरो ने समझौता किया है। इसके लिए रेलवे के इंजीनियर और इसरो संयुक्त रुप से प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।
क्या है सैटेलाइट
मानव निर्मित सैटेलाइट एक छोटी से टीवी के आकार के बराबर होता है। इसके दोनों तरफ सोलर पैनल होते हैं, जिससे इनको बिजली मिलती है। वहीं, इनके बीच में ट्रांसमीटर और रिसीवर होते हैं, जो सिग्नल को रिसीव व भेजने का काम करते हैं। इसके अलावा, कुछ कंट्रोल मोटर भी होते हैं, जिनकी मदद से सैटेलाइट को रिमोटली कंट्रोल कर सकते हैं।
रेलवे को होगा फायदा
यह अच्छी शुरूआत है, इससे रेलवे संपत्ति की पूरी तरह निगरानी हो सकेगी। सेटेलाइट के जरिये संपत्तियों पर नजर रखी जाएगी। मंडल में सभी संपत्तियों का डाटा तैयार किया जा रहा है।
मनोज कुमार सिंह, पीआरओ