झांसी। दिव्य संत समागम के दूसरे दिन शुक्रवार को संतवाणी से श्रद्धालु आध्यात्मिक संदेशों से अभिभूत हुए। तीन दिवसीय समागम में संतों ने धर्म, संस्कार, गुरु-शिष्य परंपरा, गौ संरक्षण और युवा पीढ़ी के चरित्र निर्माण जैसे विषयों पर विचार रखे।
गौ महिमा एवं गुरु तत्व महिमा विषय पर आयोजित समागम में कथा व्यास चिन्मयानंद बापू, स्वामी यतींद्रानंद गिरी महाराज, स्वामी गोपालानंद सरस्वती, महेंद्र किशोर दास देव, राजेंद्र देवाचार्य, शुद्धानंद गिरी, ईश्वर दास महाराज, गौरी शंकर दास समेत अन्य संतों ने अपने विचार रखे। चिन्मयानंद बापू ने युवा पीढ़ी पर डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई।
गो संरक्षण में सभी निभाएं अपनी भूमिका
चिन्मयानंद बापू ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को गोसेवा और संरक्षण में अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि जब लोग इसे अपनी जिम्मेदारी समझेंगे, तभी गौ संरक्षण की परंपरा को मजबूती मिलेगी।
गुरु को बताया जीवन का मार्गदर्शक
समागम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए संत-महात्माओं ने गुरु तत्व, भक्ति, सेवा, सनातन संस्कार और गौ महिमा पर विचार रखे। संतों ने कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में गुरु को केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक माना गया है। समागम के दूसरे दिन पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु संतों के दर्शन और प्रवचन सुनने पहुंचे। आयोजन स्थल पर पूरे दिन आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।