झांसी। ग्रीष्मावकाश में स्कूलों में मध्याह्न भोजन वितरण से संबंधित शासन का आदेश पहले ही दिन धड़ाम हो गया। नगर क्षेत्र के अधिकांश स्कूलों में जहां ताले लगे मिले, तो वहीं कुछ स्कूलों में शिक्षक बच्चों का इंतजार करते नजर आए।
उल्लेखनीय है कि सूखे से प्रभावित बुंदेलखंड सहित प्रदेश के कई जिलों में ग्रीष्मावकाश के दौरान स्कूलों में मध्याह्न भोजन विद्यार्थियों को वितरित करने के निर्देश शासन ने शुक्रवार को दिए थे, जो सुबह 9 बजे से 11 बजे तक वितरित होना था। लेकिन, पहले ही दिन शासन के आदेश के विपरीत स्कूलों में ताले लटके नजर आए।
हालांकि, कुछ प्राथमिक स्कूल खुले जरूर, लेकिन यहां बच्चों का इंतजार कर शिक्षक निर्धारित समय से पूर्व ही विद्यालय बंद कर चले गए।
इधर, नगर खंड शिक्षा अधिकारी राजकुमार विश्वकर्मा ने बताया कि बीएसए एवं उन्होंने यूनिट कन्या, आंतिया तालाब, नई बस्ती बालक व नई बस्ती जूनियर कन्या का निरीक्षण किया है, जो खुले मिले, लेकिन बच्चा एक भी खाना खाने नहीं आया। उन्होंने बताया कि शिक्षकों से कहा गया है कि वह बच्चों को घर से बुलाए।
सफल संचालन के लिए बने रणनीति
ग्रीष्मावकाश में मध्याह्न भोजन वितरण के पहले दिन जिला मुख्यालय में जब स्कूलों का यह हाल रहा तो, ग्रामीण अंचलों में यह कैसे सुनिश्चित हो सकेगा कि वहां मिड डे मील वितरण सुचारु रूप से संचालित हो पाएगा। बामौर, गुरसरांय, मऊरानीपुर, बंगरा ऐसे ब्लाक हैं, जहां के अधिकांश गांवों में सूखे ने लोगों के समक्ष स्थितियां काफी जटिल कर दी हैं।
ऐसे में जरूरी है कि शासन एवं प्रशासन ग्रामीण अंचलों में मध्याह्न भोजन वितरण के सफल संचालन के लिए कारगर योजना बनाए, ताकि बच्चों को सूखे में भी भरपेट भोजन मिल सके।