झांसी। नगर निगम के नए प्रशासनिक भवन ने लोकार्पण के छह माह भी पूरे नहीं किए हैं कि उसमें लगे रेड कोटा स्टोन (लाल पत्थर) भरभरा कर गिर पड़े। रात करीब दस बजे हुई इस घटना के समय वहां सन्नाटा था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। अगर कार्यालय अवधि में उक्त पत्थर गिरते तो बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। मामले की जांच के लिए नगर आयुक्त ने एक्सपर्ट कमेटी गठित कर दी है।
मंगलवार की रात करीब दस बजे प्रशासनिक भवन स्थित सदन सभागार के बाहर की तरफ लगे कोटा स्टोन भरभरा कर गिर गए। गनीमत थी कि उस समय वहां कोई नहीं था। सुबह कार्यालय खुलने पर लोगों ने नजारा देखा। जानकारी के मुताबिक कार्यदायी संस्था कंस्ट्रक्शन एंड डिजायन सर्विसेस (सीएंडडीएस) ने बिल्डिंग हैंडओवर नहीं की है। लेकिन, जनवरी माह में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दौरे के मद्देनजर आनन- फानन में इसका लोकार्पण करा लिया गया था। इस संबंध में नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने बताया कि अपर नगर आयुक्त आर सी श्रीवास्तव और अधिशासी अभियंता सतीश चंद्रा से इसकी जांच कराई जाएगी।
यह है हैंडओवर का नियम
झांसी। नियमत: बिल्डिंग हैंडओवर करते समय टेक्निकल एक्सपर्ट बिल्डिंग की टेस्टिंग करते हैं, इसके बाद ही हैंडओवर की जाती है। लेकिन, इस बिल्डिंग की टेस्टिंग के बगैर ही लोकार्पण करा दिया गया। बिल्डिंग में कहीं पर पुताई नहीं की गई है, केवल पुटट्ी के सहारे उस पर सफेदी दिखा दी गई। लिफ्ट की धोखेबाजी की कहानी जगजाहिर है। अब तो कोटा स्टोन भरभरा कर गिरने लगे हैं।