झांसी। रानी झांसी पर आपत्तिजनक पुस्तक लिखने पर भारतीय इतिहास संकलन समिति के अध्यक्ष अनिल कुमार दीक्षित ने प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि फ्रेंच लेखक प्रिंस माइकल आफ ग्रीस की पुस्तक ‘द रानी आफ झांसी’ में रानी झांसी के प्रति बहुत ही अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया गया है, जिससे उनकी भावनाएं आहत हुई हैं।
रविवार को राजकीय संग्रहालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अनिल कुमार दीक्षित ने कहा कि वर्ष 1984 में यह किताब फ्रेंच भाषा में लिखी गई थी, जिसका वर्ष 2013 में अंग्रेजी अनुवाद हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुस्तक में झांसी के एक इतिहासकार का आभार जताया गया है, जो बहुत ही शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि इसके विरोध में वह पुस्तक के प्रकाशक को कानूनी नोटिस दे चुके हैं व वह इस संबंध में खबर प्रकाशित करने वाली देश की एक नामचीन पत्रिका को भी नोटिस दे चुके हैं। उन्होंने पुस्तक को लिखित अभिमत देने वाले लेखक और पत्रकार की सहमति पर भी नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार पर दबाव बनाएंगे कि भारत में यह पुस्तक प्रतिबंधित हो और सरकार फ्रांस के राजनयिक को बुलाकर विरोध दर्ज करे तथा विश्व भर में उक्त पुस्तक की बिक्री पर प्रतिबंध लगे। उन्हाेंने कहा कि जिस प्रकार फिल्म सेंसर बोर्ड फिल्में रिलीज होने से पहले प्रमाण पत्र देता है, उसी तरह प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट में पुस्तकों/ उपन्यासों के लिए सेंसर बोर्ड गठित किया जाए।
इस अवसर पर बृजेश मिश्रा, हिमांशु दुबे, सतीश बबेले आदि मौजूद रहे।