फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नौ साल पुरानी रंजिश ने ले ली चार लोगों की जान

Mon, 20 Jan 2014 05:51 AM IST
Jhansi
विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। नौ साल पहले सरपंच के चुनाव में करारी शिकस्त मिलने से उपजी रंजिश का नतीजा एक साथ चार लोगों की हत्या के रूप में सामने आया। दरअसल, इस हत्याकांड की बुनियाद 2005 में हुए सरपंच के चुनाव में ही पड़ गई थी। नवंबर माह में मध्यप्रदेश में हुए विधान सभा चुनाव में यह विवाद अपने चरम पर पहुंच गया। हालांकि, चुनाव से एक दिन पहले हुई फायरिंग में मृतक ब्रजेश के भतीजा नीरज तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गया था। पुलिस ने तब हमलावरों में से एक को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि शेष बाहर थे और वे तिवारी परिवार पर समझौते के लिए लगातार दबाव बना रहे थे। हालांकि, तिवारी परिवार ने समझौते से इनकार कर दिया था। साथ ही स्थानीय प्रशासन के साथ- साथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। लेकिन, मध्यप्रदेश प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। शायद यही वजह रही कि परिवार के चार लोग एक साथ मौत के घाट उतार दिए गए।
विज्ञापन

बकौल नीरज तिवारी, वर्ष 2005 में गांव गढ़ कुंडार के सरपंच के चुनाव में उसकी चाची मनोरमा तिवारी पत्नी अनिल तिवारी चुनाव जीती थी, तभी से ओमप्रकाश अड़जरिया परिवार उनसे रंजिश रखने लगा। वर्ष 2010 में जब दोबारा चुनाव हुआ तो मृतक बृजेश तिवारी की पत्नी बबली तिवारी सिंदूर सागर से सरपंच के चुनाव मैदान में उतरी, जिसमें उन्होंने हरीओम अड़जरिया की पत्नी मीरा अड़जरिया को करारी शिकस्त दी। पुरानी रंजिश और गहरा गई। नवंबर 2013 में विधानसभा चुनाव में उनका पूरा परिवार भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में जुटा था और अड़जरिया परिवार सपा प्रत्याशी के समर्थन में। मतदान से एक दिन पूर्व 24 नवंबर को मौका पाकर ओमप्रकाश अड़जरिया, उनके पुत्र सत्यव्रत अड़जरिया, भतीजे देवव्रत अड़जरिया, तौफीक खां व नाजिर खां ने उसके ऊपर जान मारने की नीयत से गोली चलाई। इसकी रिपोर्ट थाना सेंधरी में धारा 307 में दर्ज करवाई गई। इस मामले में देवव्रत अड़जरिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि शेष आरोपी खुलेआम घूम रहे थे।
नीरज तिवारी ने बताया कि आरोपी उस पर लगातार समझौता करने के लिए दबाव बना रहे थे। लगातार मिल रही धमकियों के बारे में उसने स्थानीय प्रशासन से शिकायत भी की थी, मगर कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया। उसने बताया कि उन्हें कतई अहसास नहीं था कि आरोपी चुनावी रंजिश में इस तरह जान ले लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें