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भ्रष्टाचार, महंगाई और बेकारी है पहचान

Tue, 13 Aug 2013 05:36 AM IST
Jhansi
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झांसी। भारत ने जब अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरें तोड़ी और स्वाधीन देश में अंगड़ाई ली तो सबकी आंखों में सुनहरे सपने थे। देशवासियों ने सोचा था कि अब कोई गरीब नहीं होगा, कोई भी नौजवान बेरोजगार नहीं रहेगा, प्रत्येक व्यक्ति के लिए रोटी, कपड़ा और मकान की जरूरत पूरी होगी, लेकिन आजादी के 66 साल बाद भी वह सपना अधूरा है।
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भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी यहां की पहचान बन गई है। इस देशव्यापी समस्या से झांसी भी अछूता नहीं है। यहां कदम- कदम पर भ्रष्टाचार के दर्शन हो जाएंगे। अधिकतर दफ्तरों में दरबान से लेकर साहब तक फाइल पर रखे वजन के हिसाब से उसे आगे बढ़ाते हैं। महंगाई ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। आम आदमी की थाली से सब्जियां गायब होने लगीं हैं। जमीनों के कीमतें आसमान छू रही हैं, जो सामान्य आय वाले परिवार की हैसियत से बहुत दूर हो चुकी हैं।
बेरोजगारी का आलम यह है कि जिले के सेवायोजन कार्यालय में 46 हजार से अधिक पढे़- लिखे नौजवानों के नाम पंजीकृत हैं, जो नौकरी की आस लगाए बैठे हैं। लेकिन, दुर्भाग्य की बात यह है कि इनमें से यदा- कदा ही किसी निजी कंपनी में मामूली मानदेय पर रोजगार हासिल कर पाते हैं। यह तो पढ़े लिखे नौजवान हैं, जो पंजीकृत हैं। यदि जिले के बिना पढ़े लिखे लोगों को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा दो लाख से ऊपर पहुंच जाएगा।
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ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को गांव में रोजगार मुहैया कराने के लिए मनरेगा लागू है, लेकिन जिले में इसकी स्थिति भी बेहद खराब है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में डेढ़ लाख से अधिक जॉब कार्डधारक हैं, लेकिन इनमें से मात्र 42 से 45 हजार लोगों को ही रोजगार मिल पा रहा है। सरकार का दावा है कि प्रत्येक जॉब कार्डधारक परिवार को वर्ष में कम से कम सौ दिन रोजगार की गारंटी है, लेकिन जिले में यह दावे भी खोखले साबित हो रहे हैं। यहां सौ दिन रोजगार पाने वालों का आंकड़ा दस हजार से भी नीचे है। बेरोजगारों की यह फौज राष्ट्र के विकास में कोई योगदान देने के बजाए, राष्ट्र व परिवार पर बोझ बनती जा रही है, पर अफसोस कि इसका कोई समाधान सरकारों के पास भी नहीं है।

आम नागरिक की पीड़ा
गुलामी की बेड़ियां प्रत्यक्ष रूप से भले ही टूट गई हों, पर अंग्रेजों के बनाए कानून अभी भी लागू हैं। वर्षों पुराने अंग्रेजी कानूनों बदलाव किए बिना भ्रष्टाचार, बेरोजगारी व महंगाई से छुटकारा नहीं मिलेगा।
- अनिल कुमार गुप्ता, जानकीपुरम् सिविल लाइन

यदि भ्रष्टाचार पर सख्ती से रोक लगा दी जाए तो महंगाई और बेरोजगारी जैसी समस्याएं स्वत: समाप्त हो जाएंगी। भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में नेताओं व विदेशी बैंकों में जमा काला धन जिम्मेदार है।
- दिनेश शर्मा, खाती बाबा

कपड़ों की तरह पार्टी बदलने वाले नेताओं ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। सरकारी तंत्र में अग्रिम भुगतान के बाद कार्य कराने की परंपरा से भ्रष्टाचार को पनपने का मौका मिला।
- रामस्वरूप गुप्ता, सुभाषगंज

चुनाव के बाद नेताओं पर जनता का कोई अंकुश नहीं रहता, जिससेे भ्रष्टाचार पनपता है। यदि जनता को सरकार के गलत निर्णयों में दखल देने का अधिकार मिले तो इस बुराई पर रोक लग सकती है।
- मुकेश कुमार, ग्राम डेली

शिक्षा की कमी से गांवों में बेरोजगारी बढ़ रही है। बेरोजगारी से भ्रष्टाचार पनपता है और युवा गलत कार्यों की ओर मुड़ जाते हैं।
- बाबूलाल कुशवाहा, डाेंगरा, ललितपुर

राजनीति के कारण भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार के कारण बेरोजगारी बढ़ रही है। लाखों युवा काम की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन सरकार के पास कोई योजना नहीं है।
- शैलेंद्र राजपूत, ललितपुर

देश की गरीबी और बदहाली दिखाने वाली फिल्मों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार दिया जाता है। इससे पता चलता है कि विदेशों में हमारी क्या साख है।
- जिनेंद्र जैन, चौका बाग, ललितपुर

महंगाई के कारण आम आदमी को दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो रहा है। बेरोजगारी अपराधों को बढ़ावा दे रही है।
- विनोद कुशवाहा, नेहरू महाविद्यालय, ललितपुर

भ्रष्टाचार, महंगाई व बेरोजगारी पर लगाम नहीं लगाई गई तो एक बार फिर वही दौर लौट आएगा, जब लोग अपनी जरूरतें पूरी करने को मोहताज हो जाएंगे।
- नितिन जय ठाकुर, महरौनी ललितपुर

पाठकों के लिए
न्याय के लिए लड़ने वाली महिलाएं, पहनावे के चलते जिल्लत झेलनी वाली महिलाएं, सोशल मीडिया में सूचना देने वालों को अगर दबंगों ने प्रताड़ित किया हो, आरटीआई के तहत जानकारी मांगने पर परेशान किया गया हो अथवा जानकारी नहीं दी जा रही हो तो वह अमर उजाला के दूरभाष नंबर 8954886384 पर संपर्क कर सकते हैं।
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