झांसी। वाणिज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान टीम ने तीन प्रतिष्ठानों का सर्वे किया। इनमें गल्ला व्यापारी का फर्म स्थल फर्जी पाया गया, जबकि मंडी अभिलेखों में फर्म के नाम पर साढ़े तीन करोड़ का क्रय विक्रय पाया गया। इसी तरह खानपान प्रतिष्ठानों में लाखों की टैक्स चोरी पकड़ी गई। तीनों फर्मों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
विशेष अनुसंधान टीम ने शिवाजी नगर के पते पर पंजीकृत एक गल्ला प्रतिष्ठान हिमी का सर्वे किया। सर्वे में व्यापार स्थल फर्जी पाया गया। इसके बाद टीम ने गल्ला मंडी के अभिलेखों में फर्म के अस्तित्व का पता किया तो जानकारी हुई कि फर्म के नाम पर वर्ष 2012-13 में साढ़े तीन करोड़ की मूंगफली व उड़द की खरीद बिक्री की गई, जिसकी घोषणा व्यापारी ने वाणिज्य कर विभाग में दाखिल नक्शों में नहीं की थी। अब फर्म संचालक को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है।
इसी तरह एडिशन कमिश्नर को मिली बिल न देने की शिकायत पर इलाइट चौराहे के निकट स्थित शिल्पी होटल का सर्वे किया गया। जांच में पाया गया कि होटल संचालक वाणिज्य कर विभाग में फर्म को बंद दिखाकर टैक्स जमा नहीं कर रहा था। जबकि उसकी एक दिन की बिक्री के हिसाब से सालाना आय पचास लाख रुपये प्रकाश में आने की संभावना है। इसके बाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक पर स्थित ला फास्ट फूड प्लाजा के सर्वे में भी टैक्स चोरी प्रकाश में आई। जांच में पाया कि संबंधित कंपनी मुगलसरांय में अपना पंजीयन कराए है, जबकि बिक्री के हिसाब से जितना टैक्स भरना चाहिए, उतना नहीं भर रही है। बिक्री भी दस्तावेजों में नहीं दर्शाई जा रही थी। इसके अलावा पैकिंग वाले भोजन का निर्माण चित्रा चौराहा स्थित एक बेकरी के ऊपर कराया जा रहा है। परंतु कंपनी के अधिकारी स्थानीय निर्माण एवं बिक्री के विरुद्ध सर्वेक्षण अधिकारियों को कोई कागज नहीं दिखा सके।
मालूम हो कि खानपान में साढ़े तेरह परसेंट टैक्स देय है। टीम में डिप्टी कमिश्नर डा अनिल अग्रवाल, सहायक कमिश्नर मचल सिंह वर्मा, प्रशिक्षु सीटीओ शैलेष जैन आदि अफसर शामिल थे।
गुटखा में नहीं मिली टैक्स चोरी
झांसी। कोतवाली पुलिस गुरुवार की सुबह सुभाष गंज में उतर रही गुटखा की एक गाड़ी को थाने ले आई। यह खबर लगते ही व्यापारी अपने साथियों के साथ थाने पहुंच गया। व्यापारी ने बताया कि उसके पास गुटखे से संबंधित सभी प्रपत्र मौजूद हैं। गाड़ी को छोड़ दिया जाए, लेकिन पुलिस ने कोई ध्यान नहीं दिया। पुलिस को उम्मीद थी कि निश्चित ही गुटखा टैक्स चोरी करके अन्यत्र भेजा जा रहा है। बाद में वाणिज्य कर अधिकारी विनोद ठाकुर को बुलाकर प्रपत्र चेक करवाए गए। सभी प्रपत्र ठीक पाए जाने पर पुलिस को गाड़ी छोड़ना पड़ी।