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बुंदेलखंड क्षेत्र के विद्यार्थियों को पीएचडी में पांच प्रतिशत की छूट

Sun, 23 Dec 2012 05:31 AM IST
Jhansi
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय पीएचडी आर्डिनेंस कमेटी की बैठक में शोध कार्य के नियम कानून का खाका तैयार किया गया। बुंदेलखंड क्षेत्र के विद्यार्थियों को पीएचडी में पांच प्रतिशत की छूट व शोध कार्य के लिए दो साल का अवकाश सहित कई नियम बनाए गए। आर्डिनेंस को राज्यपाल कार्यालय स्वीकृति के लिए भेज दिया गया है।
प्रशासनिक भवन के सभागार में आयोजित आर्डिनेंस कमेटी की बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पंकज अत्रि ने की। बैठक में आर्डिनेंस कमेटी ने शोध कार्य के नियम का कच्चा ड्राफ्ट प्रस्तुत किया। इसमें पीएचडी में प्रवेश की पूरी प्रक्रिया को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग व उच्च शिक्षा विभाग की गाइड लाइन के आधार पर ही किए जाने की स्वीकृति बनी। पीएचडी में प्रवेश आरक्षण नियमों के तहत दिया जाएगा। डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद, द्वारा आयोजित सीईटी (कॉमन एविलिटी टेस्ट) प्रवेश परीक्षा को पास करना, नेट या जेआरएफ क्वालिफाई विद्यार्थियों को ही पीएचडी में पंजीकरण की स्वीकृति दी गई। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय व संबद्ध महाविद्यालय से परास्नातक करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश के समय पांच प्रतिशत छूट दी जाएगी। पीएचडी करने के लिए कम से कम दो साल का अवकाश लेना अनिवार्य किया गया। अभ्यर्थियों को इस आशय का एक शपथ पत्र जमा करना होगा कि वह दो सालों तक किसी प्रकार का शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कार्य नहीं करेगा। अभ्यर्थी को विश्वविद्यालय प्रशासन गाइड आवंटित करेगा, जबकि सहायक गाइड को अभ्यर्थी खुद चुन सकता है। मुख्य गाइड बुंदेलखंड विश्वविद्यालय व सहायक गाइड किसी दूसरे विश्वविद्यालय से हो सकता है। बैठक में सभी सदस्यों की सहमति के बाद पीएचडी आर्डिनेंस के फाइनल ड्राफ्ट को कुलाधिपति कार्यालय में स्वीकृति के लिए भेजे जाने पर सहमति बनी।
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बैठक में सहायक कुलसचिव डा. अंशुला सरकार, प्रो. एम एल मौर्या, प्रो. वी के सहगल, प्रो. धीर सिंह, प्रो. अपर्णा राज आदि उपस्थित रही।


अब आसान नहीं रहा पीएचडी करना!
झांसी। पांच साल बाद शुरू पीएचडी में प्रवेश बहुत ही मुश्किल हो गया है। सीईटी, नेट या जेआरएफ क्वालिफाई अभ्यर्थी को सबसे पहले रिसर्च मैथालॉजी कोर्स की पढ़ाई के लिए आवेदन फार्म जमा करना होगा। आवेदन फार्म स्वीकृत होने के बाद अभ्यर्थी को आरडीसी (रिसर्च डिग्री कमेटी) के समक्ष विषय से संबंधित मौखिक साक्षात्कार (वाइवा) देना होगा। वाइवा में पास होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन गाइड निर्धारित करेगा। गाइड के अधीन छात्र को रिसर्च मैथालॉजी की पढ़ाई पूरी कर पचास प्रतिशत अंकों के साथ परीक्षा पास करनी होगा। फेल होने की दशा में छात्र को दो अटैंप्ट का मौका मिलेगा। पास होने के बाद विद्यार्थी को अपनी सिनॉप्सिस जमा करनी होगी। सिनॉप्सिस स्वीकृत होने के बाद अभ्यर्थी पीएचडी करना शुरू कर देगा।
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