झांसी। परमार्थ समाज सेवी संस्थान एवं बुंदेलखंड अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय एक्सपर्ट ग्रुप सेमिनार के पहले दिन बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की समस्या पर विचार विमर्श किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि बुंदेलखंड में पानी की समस्या का मुख्य कारण कुप्रबंधन है।
बीआईईटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पेयजल सुरक्षा कार्यक्रम के नोडल अधिकारी सुधिंद्र शर्मा ने कहा कि बुंदेलखंड कई मायनों में पिछड़ा हुआ है, लेकिन यहां सबसे बड़ी समस्या पानी की है। उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर निर्मित पेयजल एवं स्वच्छता समितियों को प्रभावी बनाने की जरूरत है। परमार्थ सेवा संस्थान के प्रमुख संजय सिंह ने कहा कि पानी की समस्या को दूर करने में महिलाओं की मुख्य भूमिका होती है। गांव में पंचायत एवं जल सहेलियों का गठन कर पानी की समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। समकालीन अध्ययन केंद्र के निदेशक उत्कर्ष सिन्हा एवं डा. योगेश बंधु ने कहा कि बुंदेलखंड में पानी का स्रोत लगातार कम हो रहा है। इसलिए, पानी के संरक्षण की व्यवस्था बनाए जाने की जरूरत है।
विशिष्ट अतिथि पूर्व कृषि निदेशक धनपत सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड में पानी की समस्या का मुख्य कारण पानी का कुप्रबंधन है। भू गर्भ वैज्ञानिक एफ्रो, ग्वालियर के यूनिट मैनेेजर वी डी दुबे ने कहा कि बुंदेलखंड की भौगोलिक बनावट के कारण यहां पानी रिचार्ज नहीं हो पाता है। जल निगम के अधिशासी अभियंता डी के शुक्ला ने मऊरानीपुर ब्लाक में संचालित योजनाओं का जिक्र किया। बीआईईटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के हेड प्रो. अभय वर्मा ने जल संचयन पर तैयार पद्धति को प्रस्तुत किया। परमार्थ के निदेशक अनिल सिंह ने बुंदेलखंड की स्थिति पर किए गए अध्ययन का बेहतर तरीके से प्रस्तुतीकरण किया। सेमिनार में ललितपुर, जालौन एवं हमीरपुर जनपदों में कार्यरत जल सहेलियों ने अपने क्षेत्र में पानी के प्रबंधन की व्यवस्था को समझाया। सेमिनार को यूरोपियन यूनियन ने सहयोग दिया।
इस अवसर पर अनिल तिवारी, उत्तम सिंह, सुमन चंदेल, रुचि गुप्ता, संध्या शर्मा, कुमार मनीष, शिव मंगल सिंह, विनीता यादव, विनीता बाथम, संध्या सिंह, शालिनी गुप्ता, सुनीता, सतीश चंद्र, संतोष कुमार, रवि निरंजन, मानवेंद्र सिंह, प्रदीप कुमार, दीपक दीक्षित, अशोक गुप्ता आदि उपस्थित रहे।