झांसी। रूट रिले सिस्टम लागू होने के बाद अप और डाउन की कुशीनगर एक्सप्रेस व पुष्पक एक्सप्रेस के इंजन गढ़मऊ स्टेशन पर बदले जाने से बेवजह ट्रेनें लेट हो रही हैं। कर्मचारियों को भी परेशानी हो रही है, लेकिन इस ओर गौर नहीं किया जा रहा है।
रेलवे स्टेशन पर रूट रिले सिस्टम शुरू होने के बाद झांसी से कानपुर की तरफ जाने वाली कुछ प्रमुख ट्रेनों के इंजन गढ़मऊ स्टेशन पर बदलने की योजना शुरू की गई है, ताकि झांसी में इंजन बदलने में लगने वाले समय को बचाया जा सके और शंटिंग के दौरान प्लेटफार्म पर आ रही दूसरी ट्रेनों को आउटर पर खड़ा न होना पड़े। यह योजना सुविधा जनक साबित नहीं हो रही है।
कुशीनगर एक्सप्रेस व पुष्पक एक्सप्रेस तो इससे बुरी तरह प्रभावित हैं। दरअसल, झांसी आने पर दोनों ट्रेनों का ठहराव पूर्व की तरह बीस मिनट है। इसके बाद उसी स्थिति में झांसी से एक चालक व सह चालक ट्रेन को गढ़मऊ स्टेशन तक ले जाता है। इस दौरान झांसी से लखनऊ तक ले जाने वाला स्टाफ इंजन में पीछे बैठा रहता है। गढ़मऊ स्टेशन पर इलेक्ट्रिक इंजन को हटाकर डीजल इंजन गाड़ी में लगाया जाता है, जिसमें कम से कम बीस मिनट व्यय हो जाते हैं। इंजन बदलने के बाद झांसी से गए चालक व सह चालक गढ़मऊ स्टेशन पर रुक जाते हैं। यह कर्मचारी दूसरी ट्रेन को लेकर आते हैं।
अगर यह कर्मचारी शाम को कुशीनगर एक्सप्रेस लेकर गढ़मऊ स्टेशन गए तो उन्हें वापसी में लखनऊ से रात दो बजे आने वाली पुष्पक एक्सप्रेस को लेकर झांसी आना पड़ता है। इसी तरह लखनऊ जाने वाली पुष्पक एक्सप्रेस को रात दो बजे रनिंग स्टाफ गढ़मऊ स्टेशन तक ले जाता है, इसके बाद यही स्टाफ रात में स्टेशन पर रुककर सुबह लखनऊ से आने वाली कुशीनगर एक्सप्रेस लेकर झांसी आता है। इस व्यवस्था में बीस से तीस मिनट गाड़ी लेट हो रही है। साथ ही चार चालक व सह चालक भी बेवजह व्यस्त रहते हैं। वहीं इंजन बदलते समय ट्रेन गढ़मऊ स्टेशन पर खड़ी रहती है। स्टेशन के आस पास अंधेरा पसरा रहता है। इस कारण असुरक्षा भी बनी रहती है। बावजूद, रेल प्रशासन इस अव्यवस्था पर चुप्पी साधे हुए है।