झांसी। ऐतिहासिक पानी वाली धर्मशाला तालाब में मछलियों की मौत के कारणोें का पता लगाने के लिए शुरू किया गया अभियान बेनतीजा खत्म हो गया। हजारों रुपये का डीजल खर्च करने के बाद भी न तो पूरा तालाब खाली हो सका और न मछलियों की मौत के कारणों का पता चल सका। अभी मरने वाली मछलियों की संख्या कम होने के कारण उनकी बदबू आसपास के घरों तक ही पहुंच रही है, लेकिन यदि जल्दी ही ठोस प्रयास नहीं किए गए तो इससे आसपास के मोहल्लों की बड़ी आबादी के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो सकता है।
पानी वाली धर्मशाला में कछुआ, बतख, मछलियां आदि जलीय जीव रहते हैं। पिछले दिनों यहां अचानक मछलियां मरने लगीं। इस पर नगर निगम ने इसका पूरा पानी खाली कराने का निर्णय लिया। साथ ही मत्स्य विभाग को पत्र लिखकर पानी और मिट्टी की जांच कर मछलियों की मौत के कारण खोजने को कहा। इसी क्रम में नगर निगम द्वारा एक ट्रैक्टर में इंजन फिट कर तालाब का पानी खाली कराना शुरू किया गया। 12-13 दिन तक लगातार ट्रैक्टर चला। सूत्रों के अनुसार प्रतिदिन करीब 40 लीटर डीजल खर्च हुआ, लेकिन पूरा तालाब खाली नहीं हो सका। इसके बाद काम बंद कर दिया गया। कचरा भी नहीं उठाया गया। धीरे- धीरे तालाब के अंदर के जलस्रोतों से पुन: काफी पानी भर गया। उधर, एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी मत्स्य विभाग अब तक पानी और मिट्टी की जांच संबंधी रिपोर्ट भी नगर निगम नहीं भेज सका है। जबकि, मछलियों का मरना बराबर जारी है। सफाई निरीक्षक यहां प्रतिदिन मरी हुई मछलियां पानी से निकलवा रहे हैं। वहीं, पानी की बदबू आसपास के घरों तक पहुंच रही है। धर्मशाला के चारों ओर मंदिर, शिक्षण संस्थान और आबादी होने के कारण दिन भर चहल- पहल रहती है। अगर बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत हुई और सड़ाध व गंदगी फैली तो बड़ी आबादी इससे प्रभावित होगी। इसके बाद भी नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले से कन्नी काट रहे हैं।
दो फाड़ हो गई निगरानी समिति
झांसी। एक साल पूर्व तत्कालीन नगर आयुक्त जे पी चौरसिया ने तालाब में कचरा आदि डालने वालों को रोकने, उन्हें जागरूक करने और पानी की निगरानी के लिए आसपास के मंदिर के पुजारियों व समाजसेवियों की समिति गठित की थी। समिति ने कुछ दिनों तक तो अपनी जिम्मेदारी निभाई, पानी में कचरा डालने वालों पर जुर्माना भी लगाया गया, लेकिन बाद में दो फाड़ हो जाने के कारण समिति निष्क्रिय हो गई।
नि:स्वार्थ सेवा में लगा है टिन्नू
झांसी। धर्मशाला के पास रहने वाला टिन्नू सोनी नि:स्वार्थ भाव से पानी में पड़ी गंदगी हटाता रहता है। वह लोगों को पानी में गंदगी डालने से भी रोकता है। कोई बात मान ले तो ठीक, न माने तो भी वह अपना काम करता रहता है।
यह है मछलियों को बचाने के फौरी उपाय
झांसी। मत्स्य विशेषज्ञों की मानें तो पानी में आक्सीजन की कमी होने के कारण मछलियों को सांस लेने में दिक्कत होती है और उनकी मौत हो जाती है। अगर लगातार दो दिन तक 50 ग्राम पोटेशियम परमेंगनेट व 50 किलो चूना रात में भिगोकर सुबह उसे तालाब के पानी में डाला जाए तो पानी की काफी गंदगी नीचे बैठ जाती है और मछलियों को चार गुनी आक्सीजन मिलने लगती है। इसके अलावा काई को निकालकर भी पानी को स्वच्छ बनाया जा सकता है।