झांसी। जैसे-जैसे वित्तीय वर्ष के महीने घटते जा रहे हैं, वैसे- वैसे नगर निगम के टैक्स विभाग की राजस्व वसूली की चिंता बढ़ती जा रही है। पहाड़ सा टारगेट पूरा करने के लिए बिल कलेक्टरों को साफ कह दिया गया है कि अभी से जुट जाओ, क्योंकि फरवरी - मार्च के इंतजार में बहुत देर हो जाएगी।
शासन ने इस बार नगर निगम को करीब 13 करोड़ रुपये राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया है। लक्ष्य पूरा करने के लिए विभाग एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है। इसके बाद भी अभी आंकड़ा आधे तक नहीं पहुंचा है। आमतौर पर गृहकर की वसूली में साल भर उतनी तेजी नहीं रहती है, जितने वित्त वर्ष के आखिरी दो महीने (फरवरी व मार्च) में होती है। दरअसल, कभी बीएलओ, कभी जनगणना तो कभी चुनाव आदि कार्यक्रमों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दिए जाने के कारण वसूली का कार्य प्रभावित रहता है। ऐसे में कर्मचारी भी वर्ष के आखिरी समय में ही पूरा ध्यान टैक्स वसूली पर दे पाते हैं। चूंकि, टारगेट बड़ा और समय बहुत कम, ऐसे में अफसरों ने बिल कलेक्टरों को स्पष्ट कर दिया है कि फरवरी- मार्च का इंतजार मत करो, अभी से जुट जाओ। इसके लिए हाल ही में गाजियाबाद से स्थानांतरित होकर आए मुख्य कर निर्धारण अधिकारी रोहन सिंह ने एक रजिस्टर बनवा दिया है, जिसमें बिल कलेक्टरों को प्रतिदिन होने वाली वसूली का हिसाब- किताब दर्ज करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था से उन कर्मचारियों को दिक्कत होने लगी है, जो दो-तीन दिन की आय इकट्ठी करके अफसरों को बढ़ा - चढ़ाकर बताते थे।
वहीं, महानगर क्षेत्र में होने वाली जमीन की खरीद- फरोख्त पर नगर निगम को निबंधन कार्यालय से मिलने वाली दो फीसदी स्टांप ड्यूटी वसूली के लिए भी अफसर सक्रिय हो गए हैं।
कार्यालय आने वालों को लपकने की होड़
झांसी। ज्यादा से ज्यादा वसूली दिखाने के चक्कर में टैक्स कर्मियों के बीच कार्यालय में गृहकर जमा करने आने वालों को लपकने की होड़ मच जाती है। नियमत: हाउस टैक्स संबंधित वार्ड के बिल कलेक्टर के पास ही जमा होना चाहिए। लेकिन, यदि कार्यालय में संबंधित बिल कलेक्टर मौजूद नहीं होता है तो दूसरे वार्ड का कर्मचारी भी गृहकर का पैसा लेकर गृहस्वामी को रसीद पकड़ा देता है। बाद में यह रसीद संबंधित क्षेत्र के बिल कलेक्टर या टैक्स अधीक्षक के रिकार्ड में अपडेटहोगी, इसकी कोई गारंटी नहीं होती है। बिल कलेक्टरों को तो सिर्फ अपनी वसूली का ग्राफ बढ़ाने की चिंता रहती है।