झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के आर्किटेक्चर के विद्यार्थी काउंसिल आफ आर्किटेक्चर के कैप्सूल कोर्स से वंचित हैं। उनकी पढ़ाई पूरी हो चुकी है, लेकिन वह प्रैक्टिस के लिए आधिकारिक तौर पर मान्य नहीं हैं। कोर्स को पूरा कराने में शिक्षकों की कमी आड़े आ रही है।
विश्वविद्यालय परिसर में सन 2003-04 में बैचलर आफ आर्किटेक्चर का कोर्स शुरू हुआ। पाठ्यक्रम संचालन में शुरू से ही लापरवाही बरती गई, जिस कारण सन 2007 तक कोर्स को काउंसिल आफ आर्किटेक्चर से मान्यता नहीं मिल सकी। छात्रों के आंदोलन व जनप्रतिनिधियों के दबाव के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने मान्यता का प्रयास तेज किया। सन 2008 में कोर्स को काउंसिल आफ आर्किटेक्चर ने प्रथम बैच से मान्यता दे दी। काउंसिल आफ आर्किटेक्चर द्वारा मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थाओं में एक कैप्सूल कोर्स कराया जाता है। यह कोर्स काउंसिल आफ इंडिया द्वारा तैयार किया जाता है। कोर्स साढ़े चार माह का होता है। इसमें तीन माह तक तो विद्यार्थियों को आर्किटेक्चर प्रोफेशन, बाजार एवं आर्किटेक्चर की बारीकियों को पढ़ाया जाता है, जबकि डेढ़ माह तक फील्ड विजिट के माध्यम से इंडस्ट्री व प्रोफेशन की व्यावहारिक जानकारी दी जाती है। इस कोर्स को करने के बाद ही विद्यार्थी आधिकारिक तौर पर आर्किटेक्चर की प्रैक्टिस के लिए मान्य होते हैं।
छात्रों का कहना है कि कैप्सूल कोर्स की आस में पिछला बैच इधर - उधर भटक रहा है। वर्तमान बैच कई बार विभाग के हेड को कोर्स कराए जाने का आग्रह कर चुका है, लेकिन हेड शिक्षकों का रोना रोकर उन्हें उल्टे पांव वापस लौटा देते हैं। इस संबंध में विभागाध्यक्ष से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।