झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने प्राइवेट शिक्षकों के मूल्यांकन पारिश्रमिक से पांच प्रतिशत कटौती को बंद करने का निर्णय लिया है। हालांकि अंतिम निर्णय कार्य परिषद की बैठक में होगा।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में कई दशक पूर्व शिक्षक कल्याण समिति का गठन किया गया। समिति द्वारा रेगुलर शिक्षकों को शादी, बीमारी या दूसरे प्रकार की आपदाओं के समय आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इससे जुड़े सदस्य मूल्यांकन के समय मिलने वाले पारिश्रमिक का पांच प्रतिशत समिति में जमा कर देते हैं। बाद में विश्वविद्यालय हर साल स्वत: ही शिक्षकों की मूल्यांकन राशि से पांच प्रतिशत कटौती कर समिति के खाते में जमा करने लगा। सन 2000 के बाद से परिसर का विस्तार हुआ और यहां एसएफएस कोर्स संचालित किए जाने लगे। साथ ही दर्जनों की संख्या में प्राइवेट कालेज भी खुल गए। लेकिन, कटौती के नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में आने वाले प्रत्येक शिक्षक (प्राइवेट या नियमित) के पारिश्रमिक से पांच प्रतिशत कटौती करके समिति के खाते में जमा करने की प्रक्रिया बदस्तूर जारी रही।
इधर, प्राइवेट शिक्षकों ने जब समिति से आर्थिक सहायता की मांग कि तो समिति ने मना कर दिया। समिति के सदस्यों का कहना था कि यह नियमित शिक्षकों का फंड है, जबकि प्राइवेट शिक्षक आते जाते रहते हैं। यह बात एसएफएस शिक्षकों को नागवार गुजरी और मूल्यांकन पारिश्रमिक की कटौती का विरोध करने लगे। प्राइवेट शिक्षकों का कहना था कि जब उन्हें आर्थिक सहायता की सुविधा नसीब नहीं है तो उनके पारिश्रमिक से कटौती बंद होनी चाहिए। विगत दिनों एसएफएस शिक्षक संघ ने इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया। शिक्षकों की मांग को स्वीकार करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्राइवेट शिक्षकों के पारिश्रमिक से पांच प्रतिशत कटौती को बंद करने का निर्णय लिया है। इसे चार अगस्त को होने वाली कार्य परिषद में स्वीकृति मिलनी बाकी है।