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वीरांगना की कहानी, कभी न होगी पुरानी
सब हेड: राजकीय संग्रहालय के महारानी लक्ष्मीबाई वीथिका में है उनके जीवन की झांकियां
क्रासर
देखने वालों को भावुक कर देता है झांसी की रानी के बलिदान का दृश्य
झांसी।
राजकीय संग्रहालय में बनी महारानी लक्ष्मीबाई वीथिका में उनके जीवन से जुड़ी कई झांकियां वीरांगना की कहानी कहती हैं। यहां आने वाले उनके जीवन के ऐतिहासिक क्षणों के दृश्यों को देखकर रोमांचित हो जाते हैं। वहीं, उनके बलिदान का दृश्य देखकर भावुक हो जाते हैं। रविवार को झांसी की रानी का बलिदान दिवस है। उनकी कर्मभूमि में आए तमाम लोगों ने शनिवार को किला और संग्रहालय जाकर उनके शौर्य और संघर्ष को जाना।
संग्रहालय के महारानी लक्ष्मीबाई वीथिका में प्रवेश करते ही सबसे पहले आप महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान की कहानी से ही रूबरू होंगी। यहां शहादत के बाद वीरांगना के पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार का दृश्य मूर्तियां दिखाती हैं। कलाकृति में उनका पार्थिव शरीर लकड़ी की चिता पर रखा है, जिसमें अग्नि की लपटे उठने का दृश्य है। चिता के समीप में बाबा गंगादास और उनके सैनिकों की आकृतियां बनी है। इस दृश्य देखते ही लोगों का सिर श्रद्धा से झुक जाता है। इसके आगे वीथिका में महारानी के मनु से लक्ष्मीबाई बनने की गाथा के दृश्य हैं। यहां मनु के बचपन में तलवार बाजी सीखने, गणेश मंदिर में महाराज गंगाधर राव से विवाह, गंगाधर राव के निधन, शोक में डूबी रानी लक्ष्मीबाई, दामोदर राव को उत्तराधिकारी बनाने व अंग्रेजों को मैं झांसी नहीं दूंगी, रणभूमि में अन्य वीरांगनाओं व सैनिकों के साथ अंग्रेजों से लड़ने के दृश्य वीथिका के विभिन्न डायरमा में अद्भूत झांकी के रूप में है। संग्रहालय में पिछले कई महीनों से लाइट एंड साउंड बाधित है, फिर भी यहां आने वाले लोगों को निराशा नहीं होती है। वह रानी के बारे में अपनी जिज्ञासा शांत करके जाते हैं।
बोले पर्यटक, रानी का संघर्ष अद्भुत
झांसी। राजकीय संग्रहालय पहुंचे पर्यटक वीरांगना के संघर्ष की झलक देखकर उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा कि रानी का साहस असामान्य था। उनका संघर्ष भी अद्भुत था।
वीथिका देखकर आनंद आ गया
वीथिका में देखकर पता चला कि रानी लक्ष्मीबाई का जीवन कैसा रहा होगा। उनके कई चित्र हाथ से बने हैं, मराठी संस्कृति और वेशभूषा को दिखा रहे हैं। यहां आकर आनंद आ गया।
अनीता शुक्ला, शिक्षिका, कानपुर।
सांस्कृतिक कार्यक्रम हों किले में
संग्रहालय में रानी की जीवन गाथा को देखा, संतुष्टि मिली। लेकिन रानी के किले में सुधार की जरूरत है। वहां शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होना चाहिए और इसकी जानकारी पर्यटकों क ो भी मिलनी चाहिए।
यशवंत सिंह नेगी, सरकारी कर्मचारी, देहरादून।
किले में सुरक्षा के इंतजाम नहीं
किले में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। किले में कई एतिहासिक स्थलों की सूचना का बोर्ड भी नहीं दिखा। पता नहीं चलता कि किले में रानी कहां रहती थी।
अनिल सिंह राठौर, सरकारी कर्मचारी, देहरादून।