अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। सहारा निवेशकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने दो साल पहले सीआरसीएस सहारा रिफंड पोर्टल आरंभ किया था। दावा किया गया था कि उसके जरिये निवेशकों के खाते में 50 हजार रुपये पहुंचाए जाएंगे। राहत की उम्मीद देख झांसी से करीब 90 हजार निवेशकों ने पोर्टल पर पंजीकरण करा लिया, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी इनके खाते में कोई रकम नहीं पहुंची। हजारों सहारा निवेशक अब तक परेशान हैं। उन्हें यह भी बताने वाला कोई नहीं है कि जिस पोर्टल पर उन्होंने पंजीकरण कराया, उसका क्या हुआ।
18 जुलाई 2023 को सहकारिता विभाग ने पोर्टल आरंभ किया था। इसमें सहारा की विभिन्न निवेश योजनाओं में पैसा जमा करने वालों को पंजीकरण के बाद 10 से 50 हजार रुपये वापस किए जाने की बात कही गई थी। इससे झांसी में पंजीकरण कराने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। एक महीने तक चली पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान 90 हजार निवेशकों ने पंजीयन कराया। इसके दो साल बाद भी पंजीकरण कराने वालों के खाते में पैसा नहीं पहुंचा। वहीं, तमाम जमाकर्ताओं ने पुलिस से भी शिकायत दर्ज कराई है।
इनसेट
सहारा इंडिया के पास करीब 450 करोड़ जमा
सहारा इंडिया की विभिन्न जमा योजनाओं में झांसी के लोगों ने करीब 450 रुपये की मोटी रकम जमा कर रखी है। सबसे अधिक पैसा सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी में लोगों ने निवेश किया है जबकि सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी, स्टार्स मल्टीपर्पज आदि में भी लोगों ने करोड़ों रुपये जमा कर रखे हैं। इसके अलावा, कई चिटफंड कंपनियों में लोगों ने पैसा लगा रखा है। यह पैसा भी डूब गया।
सहारा का नाम देखकर हमलोगों ने बच्चों की पढ़ाई के लिए निवेश किया था। हमारी गाढ़ी कमाई की रकम लगी थी। पैसा हमें वापस नहीं मिला। हम लोगों ने पोर्टल पर भी पंजीकरण कराया। अभी तक उसके बारे में भी कुछ पता नहीं चला। - अजय साहू, सीपरी बाजार
हमसे कहा गया था कि पोर्टल पर पंजीकरण कराने पर पैसा वापस मिलेगा। करीब दो साल बाद भी इस बारे में कोई बताने को राजी नहीं। पूरी जमा-पूंजी हमारी डूब गई। - शिवकुमार कुशवाहा, प्रेमनगर
पोर्टल में जिन लोगों ने पंजीकरण कराया, उन्हें कुछ भी पता नहीं चल रहा है। काफी मशक्कत करके हमलोगों ने पंजीकरण कराया था, इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ। दो साल बाद भी पैसा कब तक मिलेगा, यह पता नहीं चला। - शिवानंद झा, नगरा
वर्जन
झांसी में 90 हजार से अधिक लोगों ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया था। इसके बाद कुछ मालूम नहीं चला। हमलोगों ने केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार को भी ज्ञापन भेजा, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। सहारा के नाम से झांसी में दर्ज संपत्तियों को सीजकर उससे मिले पैसे निवेशकों में बांटे जाएं। - संतोष गौड़, अध्यक्ष, सहारा निवेशक संघर्ष मोर्चा