झांसी। एक डरावनी तस्वीर, जिसकी दो बड़ी-बड़ी गोल आंखें हों, जो हल्के पीले रंग की दिखती हो, जिसकी एक डरावनी से मुस्कान हो और टेढ़ी - मेढ़ी नाक हो, अचानक से आपके वाट्सऐप मैसेज पर किसी अंजान नंबर से ऐसी कोई तस्वीर आए तो जरा संभल जाएं, उसका जवाब नहीं दीजिएगा। यह तस्वीर, दरअसल एक गेम चैलेंज का हिस्सा हो सकती है, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इस गेम चैलेंज का नाम है - मोमो चैलेंज। ये एक मोबाइल गेम है जो हमारे दिमाग के साथ खेलता है, डर का माहौल बनाता है और फिर जान ले लेता है। स्कूली बच्चों द्वारा खेला जाने वाल गेम चर्चाओं में हैं। इसको देखते हुए सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ) ने सभी स्कूलों को पत्र लिखकर प्रार्थना सभा में गेम न खेलने की शपथ दिलाने व जागरूक करने का निर्णय लिया है। पत्र आने के बाद स्कूलों मेें जागरूक करने का दौर भी शुरू हो गया है।
ब्लू व्हेल के बाद मोमो गेम स्कूली बच्चों व युवाओं के लिए मुसीबत बन रहा है। यह भी एक तरह का सुसाइड गेम चैलेंज है, लेकिन इसके लिए हैकर या अन्य लोग सीधे किसी के वॉट्सएप नंबर पर मैसेज भेज इस जानलवा खेल को खेलने की बात कहते हैं। इतना ही नहीं, चैलेंज पूरा नहीं करने पर फोन हैक करने तक की भी धमकियां दी जा रही हैं। ऐसा ही मामला जिले में भी आ चुका है, लेकिन गनीमत रही कि सही समय पर जानकारी जुटाने से उसकी जान बच गई। कोतवाली इलाके में रहने वाले स्कूली छात्र रजत शर्मा के वॉट्सएप पर पिछले सप्ताह विदेशी नंबर से मैसेज आया, जिसमें अनजान युवक ने अपने आप को मोमो बताया। इसके बाद उनके मोबाइल पर लगातार उसके साथ मोमो गेम खेलने के मैसेज आते रहे। इस अनजान शख्स ने उनके मोबाइल पर वीडियो कॉल भी किए। इसके बाद रजत ने जब इसके बार में इंटरनेट पर सर्च किया तो सामने आया कि यह भी एक तरह का जानलेवा खेल है। इसकी सूचना उन्होंने स्थानीय पुलिस को भी दी। हालांकि, उन्होंने इसे ब्लॉक कर दिया है, लेकिन इस तरह के गेम चैलेंज बच्चों और युवाओं के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
इसकी गंभीरता इससे समझी जा सकती है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को जिले के सभी स्कूलों में पत्र भी जारी करना पड़ा है। बबीना केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य आरके शर्मा ने बताया कि पत्र में ऑनलाइन गेम मोमो चैलेंज के प्रति सावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि बच्चों को जागरूक करने के लिए प्रार्थना सभा में पत्र पढ़ा जाएगा। बच्चों को सुझावों की कॉपी भी देंगे। इसके अलावा अभिभावकों को भी जागरूक करना शुरू कर दिया है। वहीं, पुलिस भी सोशल मीडिया के जरिए स्कूली बच्चों को जागरूक करने लगी है।
इस तरह फंसाए जाते हैं बच्चे
गेम का लिंक मोबाइल पर आने या दोस्तों द्वारा शेयर करने के बाद बच्चा उलझ जाता है और फिर वह बाहर नहीं निकल पाता। बच्चा गेम शुरू करता है तो मोबाइल हैक हो जाता है। गेम खेलने वाले बच्चे के परिवार के संबंध में पूरी जानकारी चुरा लेते हैं। शुरुआत में छोटे व आसान लक्ष्य दिए जाते हैं। पूरे होने पर उन्हें बताया जाता है कि वे विश्व में किस नंबर पर हैं। फिर आगे बढ़ने के लिए उकसाया जाता है। बड़ी हस्तियों के नाम से प्रोत्साहन के फर्जी मैसेज आते हैं। बच्चा खुश होकर आगे बढ़ता है। आखिरी स्टेज पर खतरनाक स्टंट (ऊंचाई से कूदना, हाथ काटना जैसे) करने का कहा जाता है। बच्चे को धमकाया भी जाता है कि यदि ऐसा नहीं किया तो माता, पिता, भाई, बहन को मार दिया जाएगा।
इस तरह रखें नजर
- बच्चे के मोबाइल गेम पर नजर रखें
- मोबाइल की भी परिजन जांच करें
- बच्चे को कभी भी अकेला न छोड़ें
- मोबाइल से दूर रखकर खेल खेलने दें
यह हैं लक्षण
- दोस्तों और परिवार से दूर होने पर
- चिढ़चिढ़ा और नाखुश रहना
- घबराहट में बाहर जाने से डरना
- रोचक काम में मन न लगना
- बदलावों पर पैनी नजर रखें।
बच्चों को कर रहे जागरूक
यह खतरनाक गेम है, जिसमें एक बार फंसने के बाद निकलना मुश्किल है। हम लोग स्कूल में बच्चों को जागरूक कर रहे हैं। साथ ही परिजनों को बुलाकर भी जागरूक कर रहे हैं। बच्चों को मोबाइल से दूर रखा जाए। हम लोगों ने स्कूल में स्मार्ट मोबाइल लाने पर रोक लगा दी है, ताकि बच्चे इन गेम से पूरी तरह दूर रहें।
आर के शर्मा, प्रधानाचार्य, केंद्रीय विद्यालय, बबीना