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किताबों से प्रेम खत्म तो सभ्यता नष्ट: मैत्रेयी
- राष्ट्रीय पुस्तक मेले में बोलीं हिंदी अकादमी, दिल्ली की उपाध्यक्ष
- इलेक्ट्रानिक युग में भी पुस्तकें पढ़ने का अलग आनंद: कुलपति
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय पुस्तक मेले के उद्घाटन सत्र में हिंदी अकादमी, दिल्ली की उपाध्यक्ष मैत्रेयी पुष्पा ने कहा कि आज के समय में पत्र लिखने की परंपरा खत्म हो रही है, जो कि जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका रखती है। यदि किताबों से प्रेम खत्म हुआ तो सभ्यता चली जाएगी। युवा पत्र लेखन की परंपरा जारी रखें।
उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में कभी सोचा नहीं था कि आगे चलकर पुस्तकों के मेले लगा करेंगे। पहले तो सिर्फ कॉलेज की लाइब्रेरी में ही पढ़ने की सामग्री होती थी। अब लोगों के पास ज्ञानार्जन का ज्यादा मौका है। कविताएं पढ़कर ही उनमें लिखने की उमंग जगी। उन्होंने महिलाओं के लिए चूड़ी और बिछिये से ज्यादा किताबों को महत्वपूर्ण बताया।
कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि इलेक्ट्रानिक युग में भी पुस्तकें पढ़ने का अलग आनंद है। दुख इस बात का है कि समृद्ध लोग भी पुस्तक खरीदने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाते हैं। विद्यार्थियों से कम से कम एक किताब खरीदने का आह्वान करते हुए कहा कि दिल के रकबे को बढ़ाने का काम शब्द ही करते हैं। यदि किसी को बुंदेलखंड का वर्तमान जानना है तो मैत्रेयी पुष्पा के पास जाना होगा। इसीलिए पुष्पा की कृति इदम न मम् का अध्ययन छात्र-छात्राओं के लिए अनिवार्य किया है।
विशिष्ट अतिथि साहित्यकार विवेक मिश्रा ने कहा कि किताबें ऐसी दुनिया की खिड़कियां खोलती हैं, जहां शरीर के साथ नहीं जा पाते। आज का इंटरनेट युग बहुत खतरनाक है। सोशल मीडिया पर गलत बातें तेजी से फैलती हैं। ऐसे में पुस्तकें ही सही और गलत बताने की वजह देती हैं। उन्होंने कहा कि जहां पुस्तक विरोधी संस्कृति होगी, वहां प्रथम दर्जे का समाज नहीं हो सकता। संचालन डॉ. मुन्ना तिवारी ने किया। आभार डॉ. पुनीत बिसारिया ने जताया। इस मौके पर प्रो. एसपी सिंह, प्रो. वीके सहगल, प्रो. सुनील काबिया, प्रो. एमएल मौर्य, प्रो. वीपी खरे, डॉ. सीपी पैन्यूली, इंजी. राहुल शुक्ला, डॉ. अचला पांडेय, डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी, डॉ. नवीन चंद्र पटेल मौजूद रहे।