बुंदेली कलाकारों ने फिल्मों में दिखाया जलवा
- सुष्मिता मुखर्जी ने यह भी कहा, समाज को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी कलाकारों की भी
- वरिष्ठ अदाकारा ने नाट्य कार्यशाला में दिए टिप्स
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
हिंदी फिल्मों और टेलीविजन की वरिष्ठ कलाकार सुष्मिता मुखर्जी ने कहा कि नाट्य मंचन वह सशक्त माध्यम है, जिसके द्वारा कलाकार अपनी बात रख सकता है। वह राजकीय संग्रहालय में बुंदेली सिनेमा और राजकीय संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में चल रही नाट्य कार्यशाला में हिस्सा लेने आईं थी।
सोमवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि नाटक के द्वारा सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार हमेशा होता रहा है। लेकिन, सचेत रहने की आवश्यकता है कि कलाकार अपना इस्तेमाल राजनेताओें के हाथों न होने दें। कलाकार का काम समाज को स्वस्थ रखना भी है। वरिष्ठ अदाकारा ने कहा कि वरिष्ठ कलाकारों को चाहिए कि वह नए कलाकारों को नाटक के बारे में टिप्स दें, उन्हें अवसर प्रदान कराएं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की जमीन से जुडे़ कलाकार फिल्मों और टेलीविजन में अपनी प्रतिभा को लगातार साबित कर रहे हैं। कई कलाकार नाम कमा चुके हैं।
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कलाकारोें को निरंतर अभ्यास की जरूरत
नाट्य कार्यशाला के अंतर्गत राजकीय संग्रहालय के सभागार में सुष्मिता मुखर्जी ने प्रशिक्षण ले रहे नए कलाकारोें को कई टिप्स दिए। उन्हें बताया कि लंबे डायलॉग याद करने के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत है। शरीर एक एक्टर है, जिससे जो काम कराएं, वह करता है। प्रतिभागियों के सवाल पर उन्होंने बताया कि आज का दौर टेक्नोलॉजी का है, जिसके माध्यम से कलाकार अपना लक्ष्य और प्रतिभा साबित कर सकते हैं। छोटी-छोटी फिल्में बनाएं, जिन्हें देखने के लिए दर्शक बहुत हैं। मुुंबई में ऑडीशन के वक्त सावधानी से फिल्म निर्माण कंपनी का बैकग्राउंड जानें और वीकिपीडिया पर उसके बारे में जानकारी लें। कार्यशाला में एनएसडी के प्रोफेसर मनोहर कौशलानी ने भी नए कलाकारों को टिप्स दिए। इस अवसर पर बुंदेली सिनेमा के वरिष्ठ कलाकारों में देवदत्त बुधौलिया, आरिफ शहडोली, समीर खान, दिनेश जैन, भूपेश यादव, शिवम यादव मौजूद रहे।