झांसी। धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की विवेचनाएं पुलिस समय पर नहीं निपटा पाती। इस कारण ऐसे मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा। जिले में कुल 842 विवेचनाएं लंबित हैं। इनमें करीब 80 फीसदी (छह सौ से अधिक) विवेचनाएं धोखाधड़ी से संबंधित हैं। विवेचनाओं के समय पर नहीं निपटने से भुक्तभोगी न्याय के लिए भटक रहे हैं।
पुलिस पर विवेचनाओं का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा। समय-समय पर अर्दली रूम करके पुलिस अफसर लंबित विवेचनाओं को जल्द निपटाने के निर्देश देते हैं, लेकिन इसके बाद भी लंबित विवेचनाओं का बोझ कम नहीं हो रहा है। जनपद में कुल 842 विवेचनाएं लंबित हैं। इनमें 598 विवेचनाएं तीन महीने से कम पुरानी हैं। 154 विवेचनाएं तीन माह से अधिक, 85 विवेचनाएं छह माह से अधिक पुरानी हैं और पांच विवेचनाएं दो साल बीत जाने के बाद भी पूरी नहीं हो सकीं हैं। सबसे अधिक जिनकी विवेचनाएं लंबित हैं, उनमें धोखाधड़ी के मामले शामिल हैं। 600 से अधिक मामले धारा 420 जैसी धारा से संबंधित हैं। इनमें बैंकिंग फ्राड, नौकरी के नाम पर जालसाजी, जमीन के नाम पर फर्जीवाड़ा जैसे मामले शामिल हैं। इसके बाद साइबर क्राइम से जुड़े मामले हैं। इनकी विवेचनाएं भी समय पर नहीं निपट पातीं। इस वजह से मामले कोर्ट की दहलीज तक भी नहीं ंपहुंच पाते। अफसरों का कहना है कि धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में कागज जुटाने की प्रक्रिया बहुत लंबी हो जाती है। इस वजह से संबंधित विवेचनाएं समय पर नहीं निपट पातीं।
विवेचनाएं जल्द पूरी हों, इसके लिए लगातार निगरानी की जाती है। जनपदवार पुलिस अफसरों को विवेचनाएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। विवेचनाएं लंबित रखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- सुभाष चंद्र बघेल, आईजी, झांसी रेंज