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झांसी: कोरोना काल में टल गए साढ़े नौ हजार ऑपरेशन

Wed, 19 May 2021 11:49 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

तमाम मरीज ऐसे भी रहे जो कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे की वजह से खुद भी अस्पताल जाकर ऑपरेशन कराने से दूरी बनाए हुए हैं। वे हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं और घर में रहकर ही अपना इलाज कर रहे हैं। इन हालातों में पिछले डेढ़ माह के दरम्यान जिले में साढ़े नौ हजार ऑपरेशन टल गए हैं। केवल इमरजेंसी में ही ऑपरेशन किए गए।
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operation - फोटो : istock
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विस्तार
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झांसी में कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर का हमला पहले से ही विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर भारी पड़ा है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले डेढ़ माह में जिले में साढ़े नौ हजार ऑपरेशन टाल दिए गए हैं। बात महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की करें तो वहां के सर्जिकल विभाग में रोजाना औसतन पांच ऑपरेशन हुआ करते थे, अब महीने भर में बमुश्किल दस ऑपरेशन ही किए गए हैं। अन्य सरकारी व निजी अस्पतालों की भी यही स्थिति है। अस्पतालों में केवल इमरजेंसी में ही ऑपरेशन किए गए।

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मार्च के आखिर से ही कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार जोर पकड़ने लगी थी। अप्रैल की शुरुआत से महामारी ने जिले में भयावह रूप धारण कर लिया। सरकारी अस्पतालों में जगह कम पड़ने पर निजी अस्पतालों को कोविड हॉस्पिटल में तब्दील करते हुए वहां कोरोना के मरीज भर्ती किए जाने लगे। इन परिस्थितियों में अभी भी ज्यादा परिवर्तन नहीं आया है।

महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, रेलवे अस्पताल, कैंट अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य केंद्रों व सत्तर से अधिक निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित वे मरीज हुए हैं, जो पहले से किसी बीमारी से ग्रसित थे और उनका इलाज चल रहा था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह देते हुए तिथि तय कर दी थी। लेकिन, अचानक ऑपरेशन रद्द करने पड़ गए।
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तमाम मरीज ऐसे भी रहे जो कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे की वजह से खुद भी अस्पताल जाकर ऑपरेशन कराने से दूरी बनाए हुए हैं। वे हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं और घर में रहकर ही अपना इलाज कर रहे हैं। इन हालातों में पिछले डेढ़ माह के दरम्यान जिले में साढ़े नौ हजार ऑपरेशन टल गए हैं। केवल इमरजेंसी में ही ऑपरेशन किए गए।

केस - 1
एक माह से है ऑपरेशन का इंतजार

झांसी। जेल चौराहा निवासी 72 वर्षीय कन्हैयालाल को हार्निया की समस्या है, जिसका वह पिछले कई महीनों से एक प्राइवेट डॉक्टर से इलाज करा रहे हैं। डॉक्टर ने उन्हें ऑपरेशन की सलाह दी थी और इसके लिए 15 अप्रैल की तिथि तय की थी। लेकिन, अस्पताल कोविड हॉस्पिटल में तब्दील हो गया, जिससे उनका ऑपरेशन टल गया है। डॉक्टर से फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने दवाइयां बढ़ा दी हैं। साथ ही कहा है कि हालात सामान्य होने पर ऑपरेशन कर देंगे।

केस - 2
अभी अस्पताल जाने से लग रहा है डर

झांसी। नगरा निवासी आशा के गर्भाशय में समस्या है। लंबे समय से वह इसका इलाज करा रही हैं, परंतु आराम नहीं मिला। आखिर में डॉक्टर ने उन्हें ऑपरेशन की सलाह दी, जिसके लिए वह राजी हो गईं थीं। लेकिन, कोरोना वायरस के संक्रमण के इस दौर में अब उनकी अस्पताल जाकर ऑपरेशन कराने की हिम्मत नहीं पड़ रही है। आशा का कहना है कि अस्पताल में उन्हें खुद व परिजनों के संक्रमित होने का डर सता रहा है। तकलीफ झेल रहे हैं, परंतु ऑपरेशन कोरोना खत्म होने के बाद ही कराएंगी।

केस - 3
मां के पैर का ऑपरेशन टाला

झांसी। मिशन कंपाउंड निवासी मनोज की मां के घुटने में समस्या है। उनका इलाज पिछले एक साल से जारी है। लेकिन, दवाइयों से कोई लाभ नहीं मिला। डॉक्टर की सलाह पर वह मां के घुटने का ऑपरेशन कराने की तैयारी में थे। लेकिन, अचानक कोरोना के हमलावर होने से उन्होंने फिलहाल ऑपरेशन टाल दिया। मनोज ने बताया कि मां चलने फिरने से लाचार हैं। ऑपरेशन कराना जरूरी है। लेकिन, डॉक्टर तैयार नहीं हैं। डॉक्टर का कहना है कि कुछ दिन इंतजार करने के बाद ऑपरेशन कर दिया जाएगा। अभी कोरोना का खतरा है।

ऑक्सीजन की कमी भी बनी वजह
सामान्य तौर झांसी में प्रतिदिन बीस मीट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत होती है। इसमें अकेले मेडिकल कॉलेज में ही चौबीस घंटे में दस मीट्रिक टन ऑक्सीजन का इस्तेमाल हो जाता है। लेकिन, कोरोना काल में ऑक्सीजन की भारी कमी पैदा हो गई थी। जबकि, ऑपरेशन के दरम्यान ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता होना जरूरी होता है। ऐसे में ऑपरेशन टाल दिए गए थे।

महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी ऑपरेशन लगातार जारी रहे। केवल वही ऑपरेशन नहीं हुए, जिन्हें बाद में भी किया जा सकता है। इसके अलावा ओपीडी बंद होने की वजह से मरीज भी कम आए। संक्रमण के खतरे की वजह से भी तमाम मरीजों ने रुख नहीं किया। इससे ऑपरेशन की संख्या खासी घट गई है।- डॉ. पंकज सोनकिया, असिस्टेंट प्रोफेसर (सर्जरी) - महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज

निजी अस्पतालों में बड़े पैमाने पर कोरोना वायरस के संक्रमितों का इलाज किया जा रहा है। चिकित्सकों का इन दिनों फोकस इस महामारी से निपटने पर है। यही वजह है कोविड अस्पतालों में तब्दील हॉस्पिटल में सामान्य ऑपरेशन नहीं किए जा रहे हैं। इमरजेंसी मरीजों के ही ऑपरेशन हो रहे हैं। वहीं, सामान्य मरीज भी अभी अस्पतालों की ओर रुख नहीं कर रहे हैं।- निलय जैन, उपाध्यक्ष, यूपी नर्सिंग होम एसोसिएशन
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इन-इन रोगों के ऑपरेशन टले
- मोतियाबिंद और आंख संबंधी- 3000
- हड्डी संबंधी- 1000
- हार्निया- 700
- रसौली और स्त्री रोग संबंधी- 1200
- ट्रांसप्लांट- 800
- पथरी- 1400
- दांत संबंधी- 700
- कटे-फ टे होंठ के- 300
- हार्ट सर्जरी- 200
- कान संबंधी- 150

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