कोरोना काल में रेलवे ने बिना व्यवधान के पटरियों से जुड़े कई कामों को पूरा कर लिया। बिना ब्लाक लिए ही मंडल में 770 किलोमीटर पटरियों की जांच और 107 किलोमीटर में गिट्टियों की सफाई का काम पूरा कर लिया। खजराहा, बिजौली स्टेशन पर तीसरी रेल लाइन के लिए इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग का काम पूरा कर लिया गया। साथ ही खजराहा, बिजौली स्टेशन पर तीसरी रेल लाइन के लिए इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग का काम पूरा कर लिया गया।
रेलवे ट्रैक गिट्टियों की मजबूती पर ही टिका होता है। लगातार ट्रैक पर ट्रेनों के दौड़ने से कुछ गिट्टियां महीन होकर पिस जाती हैं तो कुछ छोटी हो जाती हैं। साथ ही मिट्टी भी भर जाती है। पटरियां कमजोर न हो जाएं इस बात का ध्यान रखकर हर दस साल में रेलवे को गिट्टियों की सफाई करवानी पड़ती है। यह काम एक से दो घंटे का ब्लाक (ट्रेनों रोककर) लेकर कई दिनों तक करना पड़ता है। जिस दिन ब्लाक नहीं मिलता है उस दिन काम बंद रखना पड़ता है। मगर कोरोना काल मेें रेलवे ने मंडल में 107.85 किमी के ट्रैक पर गिट्टियों की सफाई का काम ब्लास्ट क्लीनिंग मशीन द्वारा पूरा कर लिया।
साथ ही ट्रैक के संरक्षा को ध्यान में रखते हुए अल्ट्रासोनिक फ्ला डिटेक्शन तकनीक द्वारा पटरियों की जांच की गई। मंडल में 103 ब्रिज का नियमित तकनीकी परीक्षण किया गया। इसके अलावा मंडल में रेल पटरियों को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए पटरियों के नीचे गिट्टी को पैक (या टैंप) करने के लिए 346.35 किलोमीटर के ट्रैक की तथा 179 किलोमीटर टर्नआउट की टैम्पिंग (पटरियों की क्लिपों की देखरेख) की गई।
ये काम पूरे किए गए
- भोपाल ट्रैक पर खजराहा व बिजौली स्टेशन पर इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग का काम।
- बांदा ट्रैक पर रानीपुर रोड तथा रोरा स्टेशन पर इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग का काम।
- मालनपुर स्टेशन पर इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग का काम।
- आंतरी, अनंतपैठ, करौंदा, मोहासा सेक्शन में रखरखाव के काम।
- ब्लास्ट क्लीनिंग मशीन द्वारा मिट्टी एवं छोटी गिट्टी को ट्रैक से अलग करने का काम।
- झांसी व आसपास के ओएचई डिपो के शेष अनुरक्षण कार्य पूरे किए गए।
- झांसी स्टेशन पर क्विक वाटरिंग सिस्टम स्थापित किया गया।
- झांसी स्टेशन के प्लेटफार्म दो- तीन पर नए ब्रिज पर रैंप बनाने का काम।
- ललितपुर स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे व सर्विलांस सिस्टम स्थापित किया गया।