रेलवे जेई विभागीय परीक्षा में छह कर्मचारी मिले अपात्र
- पहले भी सूची से हटाया जा चुका है इनमें से एक का नाम
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। रेलवे में जेई की विभागीय परीक्षा चर्चा में बनी रही है। लिखित परीक्षा के बाद तीन साल से कम नौकरी के एक अपात्र कर्मचारी को हटाने के बाद अब छह कर्मचारियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र अयोग्य पाए गए हैं। इन कर्मचारियों को भी सूची से हटा दिया गया है। हालांकि, अभी अंतिम परिणाम जारी नहीं हुआ है।
रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग में 20 प्रतिशत जूनियर इंजीनियर के पद विभागीय कोटे से भरने के लिए 31 मई 2017 को अधिसूचना जारी की गई थी। इसमें इंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत ट्रैक मेंटेनर और रेलपथ पर काम करने वाले जैसे लोहार, वैल्डर, बोल्डर, एलाइनर, पेंटर, कारपेंटर कर्मचारियों से विकल्प मांगे गए थे। इसमें अधिसूचना की तिथि तक कर्मचारी की तीन साल की नौकरी अनिवार्य थी। 18 मार्च 2018 को आयोजित परीक्षा में 102 पात्र कर्मचारी बैठे। कार्मिक विभाग को परीक्षा होने के बाद पता लगा कि उरई में कार्यरत एक कर्मचारी की नौकरी को तीन साल नहीं हुए। बाद में उसके नाम को सूची से हटाया। अब ऐसे छह और कर्मचारियों का पता लगा है, जिनके डिप्लोमा मान्यता प्राप्त संस्थान के नहीं है। इन कर्मचारियों के भी नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इससे परीक्षा सवालों के घेरे में आ गई है। दरअसल, परीक्षा से पूर्व कर्मचारियों के दस्तावेजों की एसएसई से लेकर हर स्तर पर होती है। मगर, इसके बाद भी चूक हो गई।
जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि परीक्षा के बाद ही प्रमाणपत्रों की जांच कराई जाती हैं। जिन कर्मचारियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र सही नहीं पाए जा रहे हैं, उनके नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। इसमें कोई चूक नहीं है।
जांच होनी चाहिए
यह विभागीय परीक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मी को सीधा जेई बनने का मौका मिलता है। परीक्षा से पूर्व प्रमाणपत्रों की जांच होती है। इसके बाद भी ऐसी लापरवाही की जांच होनी चाहिए। रेलवे बोर्ड स्तर पर जांच हो। जांच पूरी होने तक अंतिम परिणाम को रोके रखा जाए।
विश्वनाथ यादव, सहायक सचिव रेलवे कर्मचारी ट्रैकमैन एसोसिएशन।