आर्थिक तंगी एवं कर्ज से परेशान एक किसान ने सोमवार की रात खेत पर बने टपरे में फांसी लगाकर जान दे दी। किसान के पास मात्र एक बीघा जमीन थी उसी से वह गुजर बसर कर अपने परिवार का भरण पोषण करता था। सरकारी बैंक और साहूकारों के कर्ज के बोझ तले दबा किसान कई दिनों से मानसिक रूप से परेशान था। उसकी खरीफ की फसल भी बर्बाद हो गई थी। इसी चिंता में उसने फांसी लगा ली।
थाना एरच के गांव बामौर निवासी 70 वर्षीय कमल कुशवाहा पुत्र नंदलाल कुशवाहा अपने खेत में फसल की रखवाली के लिए खेत पर ही टपरा बनाकर पत्नी मुन्नी देवी के साथ रहता था। छह अक्तूबर की सुबह उसका पुत्र किशोरी लाल कुशवाहा खेत पर गया तो उसने टपरे में जाकर देखा कि उसका पिता कमल कुशवाहा टपरे के ऊपर लगी बल्ली से रस्सी के सहारे लटका था। आननफानन में उसने अपने पिता को नीचे उतारा लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। उसने परिजनों और पुलिस को सूचना दी।
मौके पर पुलिस के साथ पहुंचे थाना अध्यक्ष ने जायजा लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। परिजनों के मुताबिक कमल की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी, एक बीघा जमीन से जैसे-तैसे काम चल रहा था। कमल पर सरकारी ओर साहूकारों का लगभग तीन लाख का कर्ज था, उसी चिंता में वह हमेशा परेशान रहता था लेकिन इस बार खरीफ की फसल भी बर्बाद होने के कारण वह चिंतित रहने लगा था।
किसान कमल कुशवाहा के नाम कुल सवा बीघा जमीन है। जमीन का माह फरवरी में पंजाब नेशनल बैंक शाखा बामौर में 44 हजार रुपये का केसीसी बना है। उसकी पत्नी मुन्नी देवी और उसके पुत्र की पत्नी के नाम पात्र गृहस्थी का राशन कार्ड है। घटना की जांच की जा रही है।
-मनोज कुमार, तहसीलदार गरौठा