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संयम स्वर्ण महोत्सव-City

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संयम स्वर्ण महोत्सव 17 को
सब हेड ---- आचार्य विद्यासागर महाराज के 51 वें दीक्षा दिवस पर जैन मंदिरों में होगी महाआरती

- करगुवांजी जैन मंदिर में होगी महापूजा और युगल ज्ञान प्रतियोगिता का फाइनल
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। राष्ट्रसंत आचार्र्य विद्यासागर महाराज का 51 वां मुनि दीक्षा दिवस 17 जुलाई को संयम स्वर्ण महोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन जैन समाज सुबह 5 बजे प्रभात फेरी निकालेगा। रात 8:30 बजे सभी जैन मंदिरों में एक साथ महाआरती होगी। यह आयोजन देश भर के जैन मंदिरों में होगा।
रविवार को करगुवांजी जैन मंदिर में आर्यिका पूर्णमति माताजी ने पत्रकारों को बताया कि आचार्य विद्यासागर महाराज प्रकृति क ा प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्हें 50 वर्ष पूर्व दिगंबर मुनि ज्ञानसागर महाराज ने आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पंचमी पर दीक्षा दी थी। इस दीक्षा दिवस को जैन समाज देश भर में संयम स्वर्ण महोत्सव के रूप में मना रहा है। खजुराहो में होने वाले आयोजन में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हिस्सा लेंगे।
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उन्होंने बताया कि शहर में सुबह कटरा जैन मंदिर से प्रभात फेरी निकाली जाएगी। सुबह 7:30 बजे करगुवांजी मंदिर में महा पूजा होगी। 15 व 16 जुलाई को युगल ज्ञान प्रतियोगिता का फाइनल होगा। इसमें प्रथम विजेता को दस ग्राम, द्वितीय को पांच ग्राम और तृतीय विजेता को तीन ग्राम सोना का मेडल पुरस्कार में दिया जाएगा। शाम को प्रवचन के बाद सभी जैन मंदिरों में महाआरती होगी। महोत्सव दिवस पर जैन समाज का प्रत्येक व्यक्ति 50 - 50 पौधे भी रोपेगा। इस अवसर पर ब्रह्मचारी आशीष जैन, प्रदीप जैन आदित्य, सुभाष जैन, ऋषभ जैन, रविंद्र जैन, प्रवीण जैन, कमल जैन मौजूद रहे।


सिद्ध चक्र महामंडल विधान 20 से
करगुवांजी जैन मंदिर में 20 जुलाई से विश्व शांति महायज्ञ सिद्ध चक्र महामंडल विधान होगा। आठ दिन चलने वाले इस आयोजन में बुंदेलखंड के कई जिलों से श्रद्धालु जुटेंगे। आर्यिका पूर्णमति माताजी ने बताया कि सिद्ध चक्र महामंडल विधान में प्रतिदिन भगवान का महाभिषेक व शांतिधारा होगी। भगवान के गुणों पर प्रवचन होंगे। 27 जुलाई को विश्व शांति महायज्ञ में प्राकृतिक आपदा से प्राणी जगत को निजात मिले, इसकी ईश्वर से कामना की जाएगी।
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झांसी में है पहला चातुर्मास
आचार्य विद्यासागर महाराज की शिष्या आर्यिका पूर्णमति माताजी ने बताया कि झांसी में उनका पहला चातुर्मास है। वह 12 वर्ष पहले विहार करते हुए झांसी आयी थीं। चातुर्मास में महिलाओं व पुरुषों के लिए शिविर लगेंगे। इसमें प्रवचन होेंगे।
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