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तत्काल टिकट

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तत्काल टिकट के लिए धक्के खा रहे यात्री
- भीषण गर्मी में भी ट्रेनों में उमड़ रही भीड़
- पूरी सीट तो दूर आरएसी भी नहीं मिल रही
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
भीषण गर्मी में भी ट्रेनों में भीड़ उमड़ रही है। आरक्षण का हाल बुरा है। प्रतीक्षा सूची में शामिल टिकट का कन्फर्म होना तो दूर, आरएसी भी क्लीयर नहीं हो रहा है। मजबूरन यात्रियों को तत्काल में टिकट लेने के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं।
स्कूल की छुट्टियां होने के साथ ही लोगों का पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर जाना शुरू हो गया है। चूंकि, अधिकांश ट्रेनें पहले से ही फुल चल रही हैं, इस कारण एक दिन पहले मिलने वाले तत्काल टिकट के लिए मारामारी मची हुई है। यात्रियों को अधिक किराया देने के बाद भी बर्थ नहीं मिल पा रही है। तत्काल में आरक्षण टिकट पाने के लिए यात्री तड़के चार-पांच बजे से आरक्षण कार्यालय के बाहर कतार में खड़े हो रहे हैं। वह क्लीयर टिकट पाने के लिए मुंहमांगी कीमत देने को भी तैयार हैं, लेकिन बर्थों की संख्या कम होने के कारण उन्हें मायूस होना पड़ रहा है। यही हाल इमरजेंसी कोटे का बना हुआ है। चयनित ट्रेनों में दो से चार सीटें इमरजेंसी कोटे की होती है। हालत यह है कि एक ट्रेन के लिए चालीस से पचास प्रार्थना पत्र आ रहे हैं।
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शनिवार की सुबह आरक्षण कार्यालय में तत्काल टिकट लेने पहुंचे सिविल लाइन निवासी अमित गुप्ता ने बताया कि उनको परिवार के साथ वैष्णो देवी जाना है। वह तत्काल में कन्फर्म टिकट मिलने की आस में आए थे। धक्के खाने के बाद चार नंबर टोकन नंबर मिला, लेकिन जब टिकट बनने का नंबर आया तो सीटें फुल हो गई। कमोबेश इसी स्थिति से अन्य यात्रियों को जूझना पड़ रहा है। सभी प्रमुख ट्रेनों में तत्काल टिकट का यही हाल है। और छोड़िए इन दिनों झांसी से गुजरने वाली झेलम एक्सप्रेस, अंडमान एक्सप्रेस, मालवा एक्सप्रेस, पंजाब मेल, पठानकोट एक्सप्रेस, मंगला एक्सप्रेस, गोवा एक्सप्रेस, उत्कल एक्सप्रेस, आंध्रा एक्सप्रेस, सदर्न एक्सप्रेस, पुष्पक एक्सप्रेस, ग्वालियर बरौनी छपरा मेल, इंदौर पटना एक्सप्रेस, महाकौशल एक्सप्रेस, गोरखपुर कोचीन एक्सप्रेस, कुशीनगर एक्सप्रेस आदि ट्रेनों में आरएसी कंफर्म नहीं हो पा रहा है।
जानिए आरएसी
रेलवे कंफर्म सीटों के उपरांत यात्रियों को आरएसी (रिजरवेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन) में बर्थ उपलब्ध कराता है। आरएसी का टिकट मिलने पर यात्री को साइड लोअर बर्थ की आधी सीट उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वह कुछ हद तक परेशानी से बच सके। एक स्लीपर कोच में नौ साइड लोअर बर्थ होती हैं। इनमें आठ बर्थों पर सोलह यात्रियों को आरएसी टिकट जारी किया जाता है। अगर अंतिम समय तक आरएसी कंफर्म नहीं होता है तो दो यात्रियों को एक बर्थ पर ही बैठना पड़ता है। इतना अवश्य है कि अगर कोई यात्री अपनी बर्थ पर नहीं आता है तो कोच टीटीई सबसे पहले आरएसी यात्री को ही बर्थ देगा। जिस यात्री का आरएसी नंबर सबसे कम होगा, उसे पहले सीट दी जाएगी।
जनरल कोचों का भी बुरा हाल
ट्रेनों के जनरल कोचों का भी बुरा हाल बना हुआ है। अधिकतर गाड़ियों में पैर रखने को जगह नहीं है। वहीं, रेल प्रशासन की तरफ से कोई अतिरिक्त इंतजाम न होने के कारण यात्रियों की परेशानी कम नहीं हो रही है।



तत्काल टिकटों में रेलवे ने बढ़ाई निगरानी
- आईआरसीटीसी के सॉफ्टवेयर में सेंध लगने के बाद बढ़ी सतर्कता
- गर्मी में बढ़ती भीड़ का फायदा उठा रहे कुछ एजेंट
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
रेलवे में रिजर्वेशन टिकट बुक कराने वाले एजेंटों के सॉफ्टवेयर में सेंध लगाने के मामले में रेलवे ने निगरानी बढ़ाई है। एक विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर दलाल हजारों से लेकर लाखों रुपये के टिकट बना रहे हैं।
गर्मी का सीजन होने के कारण किसी भी ट्रेन में सीट उपलब्ध नहीं है। अधिकांश ट्रेनों में भी नो-रूम की स्थिति बनी हुई है। जिनमें रिजर्वेशन मिल रहा है, उनमें 150 से 200 वेटिंग अधिक है। घुमने की चाह रखने वाले लोग परेशान हैं। इस बीच एजेंट सक्रिय होकर इसका फायदा उठाने से नहीं चूक रहे। रिजर्वेशन करने वाले कुछ एजेंट आईआरसीटीसी के सॉफ्टवेयर में सेंध लगाकर टिकट बना रहे हैं। ऐसे एजेंट सेंधमारी करने के लिए एक स्पेशल सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सूत्रों से पता चला है कि एक सॉफ्टवेयर एक महीने में निष्क्रिय हो जाता है, इसके बाद पुन: सॉफ्टवेयर को खरीदना पड़ता है। टिकट बुक करने वाले कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं। जो ऑनलाइन आईआरसीटीसी के साफ्टवेयर को पहले हैक करता है, इसके बाद वह आईआरसीटीसी के साफ्टवेयर को खुद संचालित करके टिकट बनाने लगता है। कुछ समय में ही यह सॉफ्टवेयर एजेंट के लिए टिकट बना देता है। सीबीआई ने पिछले दिनों तत्काल के रिजर्वेशन में सॉफ्टवेयर से हो रहे खेल का खुलासा किया था। तब पता चला था कि एजेंट स्पेशल सॉफ्टवेयर के जरिये पहले ही टिकट बुक कर लेते थे। सॉफ्टवेयर से पीएनआर जेनरेट करने की प्रक्रिया तेज हो जाती थी। इसी का फायदा उठाकर एजेंट आईडी से लॉगइन कर एक साथ कई टिकट बुक कर लेते। यह भी पता चला है यह कंपनी साउथ की एक कंपनी ने बनाया है।
जो आईआरसीटीसी के साफ्टवेयर को हैक करने वाले सॉफ्टवेयर तैयार करती है। इस सॉफ्टवेयर को एजेंट के पास पांच से छह हजार रुपये में मुहैया करा दिया जाता है। बताया गया है कि इसकी स्पीड भी अधिक होती है। वैधता खत्म होने के बाद नया सॉफ्टवेयर मंगवाना पड़ता है।
आईपी अड्रेस की करते हैं जांच
रेल अफसरों के मुताबिक इसको लेकर रेलवे प्रशासन अलर्ट है। अगर किसी निजी अकाउंट से एक बार में तीन से ज्यादा तत्काल टिकट बुक होते हैं या लगातार उस अकाउंट से टिकट बुक हो रहे हैं तो आईपी एड्रेस के जरिए जांच की जाती है। साथ ही निजी अकाउंट से मिलने वाले टिकट पर लिखा होता है कि यह टिकट बिक्री के लिए नहीं है। ऐसे टिकट पर यात्रा करने वाला अगर वैध कागजात नहीं दिखा पाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
एजेंट के लिए जरूरी है प्रमाणपत्र
रेलवे से मान्यता प्राप्त एजेंट अपने नीचे सब एजेंट बना सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार सभी एजेंट्स की भी समय-समय पर जांच की जाती है। एजेंट्स के लिए उनके कार्यालय पर बोर्ड लगाना और खिड़की के सामने ही ऐसे स्थान पर प्रमाणपत्र लगाना जरूरी किया गया है, जहां से वह आम आदमी को दिखाई दे। अगर किसी एजेंट के पास ये दोनों चीजें नहीं हैं तो उससे टिकट बुक न कराएं और अपने नजदीकी रेलवे स्टेशन पर सूचना दें।
तत्काल का समय
एसी के लिए तत्काल बुकिंग सुबह 10 बजे और स्लीपर के लिए सुबह 11 बजे का समय फिस्क है। इसके पहले टिकट नहीं होता। चंद सैकेंड से ही टिकटों की बिक्री हो जाती है।
तुरंत मिला कन्फर्म टिकट
सीपरी बाजार इलाके में रहने वाले शाकिर खान ने बताय कि वे अपने परिवार के साथ मुंबई जाना चाहते हैं। गर्मी में सभी ट्रेनें फुल होने के कारण क्लीयर टिकट नहीं मिला पा रहा है। दो दिन से स्टेशन पर भीड़ होने के कारण यहां टिकट नहीं बन सका। सोमवार को उन्होंने एजेंट से बात की और आखिरकार उनको कंफर्म टिकट मिल सका, इसके लिए उनको मुंहमांगी रकम भी खर्च करना पड़ी।
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सतर्कता विभाग कर रहा निगरानी
रेलवे का सतर्कता व वाणिज्य विभाग ऐसे एजेंटों पर विशेष निगरानी रख रहा है। इसके लिए आरपीएफ भी लगातार कार्रवाई करती है। पिछले सप्ताह ही एक युवक को पकड़ा भी था। इसके साथ ही रेलवे स्तर पर अधिकारियों की टीम निगाह रख रही है, जल्द ही ऐसे स्थानों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
मनोज कुमार सिंह, पीआरओ
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