हे राम ! बड़े सस्ते में निकल जाती पालीवासियों की जान
पाली। नगर पंचायत पाली को तहसील का दर्जा तो मिल गया, लेकिन 20 साल से बहुप्रतिक्षित प्रस्तावित अस्पताल का निर्माण अब तक नहीं हुआ। क्षेत्रवासी आज भी अपने रहनुमाओं की ओर टकटकी लगाए है कि अस्पताल का निर्माण जल्द हो जाए, जिसका लाभ पूरे क्षेत्र को मिल सके। बीते दो दिनों में हार्टअटैक के चलते पान की खेती की करने वाले किसान नारायन चौरसिया व मुख्य बाजार निवासी पलटूराम साहू की जान चली गई। अगर उन्हें समय से उपचार मिल जाता तो शायद दोनों की अकाल मृत्यु होने से बचाया जा सकता था।
केंद्र के साथ सूबे में भाजपा का ऐतिहासिक कमल खिला है। क्षेत्रीय सांसद उमा भारती मोदी सरकार में मंत्री तो सूबे की योगी सरकार में स्थानीय विधायक राज्यमंत्री है। जिससे पाली व क्षेत्रवासियों में विकास की बड़ी उम्मीद रहती है। 14 बरस के वनवास से लौटी भाजपा व स्थानीय विधायक पाली में 20 साल से प्रस्तावित अस्पताल का शीघ्र निर्माण कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक उसका निर्माण नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर ऐसा अब तक कुछ भी नजर नहीं आ रहा है जिससे लगे कि सीएचसी का निर्माण जल्द शुरू हो सके। इसे बिड़म्मना नहीं तो और क्या कहें कि जिले की तीसरी बड़ी नगर पंचायत पाली में एक सरकारी सुविधायुक्त अस्पताल तक नही हैं। ऐसे में इलाज के अभाव में कई अपनों के गुजर जाने का दर्द लोगों के दिल मे बड़े जख्म पैदा कर देता है। अस्पताल के लिए लोग बरसो से टकटकी लगाएं बैठे है लेकिन उनकी मुराद है कि अब तक पूरी नही हुई। पाली व आसपास के लोगों मे अपने व अपनों के इलाज को लेकर बड़ी समस्या बनी रहती है। जिसके कारण बीते कई सालों से अस्पताल की मांग तेज होती गयी। तो कई बार आंदोलनो का भी सहारा लिया। लेकिन कोई फायदा नही हुआ।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पाली के लिए अस्पताल स्वीकृत हो चुका था। जिसके लिए वर्ष 1998 मे रेंज चौकी के पास जमीन मुहैया कराकर अस्पताल के लिए चिह्ंित कर दी गई थी। लेकिन निर्माण के लिए बजट जारी नहीं हो सका। सूबे में अखिलेश सरकार आई तो सीएचसी अपने ठंडे बस्ते से बाहर निकलती दिखी, लेकिन धरातल पर कुछ नजर नहीं आया। बीते एक महीने पहले अस्पताल को लेकर जमीन की पैमाइश की बात सामने आई थी इसके बाद कुछ मालूम नहीं चला कि प्रस्तावित सीएचसी को धरातल पर लाने के लिए क्या गतिविधि की जा रही है।
दो दिन में चली गई दो जानें...
शुक्रवार को पान किसान नारायन चौरसिया अपने पान वरेजों की ओर जा रहा था रास्ते में अचानक सीने में ऐसा दर्द उठ कि जान पर बन आई। जब तक जिला चिकित्सालय जाने के लिए निजी बाहन का इंतजाम हो पाता तब तक तड़पकर जान चली गयी। मुख्य बाजार निवासी पलटूराम साहू (कूरे) को शनिवार की रात अचानक सीने में तेज दर्द उठा। आनन फानन स्थानीय चिकित्सको के यहां ले जाया गया, लाभ नही मिला। परिजन आगे ईलाज के लिए जिला चिकित्सालय ले जा रहे थे कि रास्ते में ही दम तोड़ दिया। नारायन चौरसिया अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गए तो वहीं सब्जी विक्रेता पलटूराम अपने पीछे पत्नी व एक मासूम बच्चे को बिलखता हुआ छोड़ गया।
कानों में ही चल रहा अस्प्ताल निर्माण..
अस्पताल की मांग लंबे अरसे से की जा रही है। इलाज के अभाव में पाली के लोगाें को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं। वह कई सालों से प्रतिनिधियों से यहीं सुनता आ रहा हूँ कि पाली को अस्पताल प्रस्तावित है, जल्द इसका लाभ मिलेगा। लेकिन ऐसा कुछ अभी तक नहीं हो सका है।
पंडित दयाशंकर उपाध्याय
चुनावी मुद्दा बस बनकर रह गया अस्पताल
अस्पताल का न होना कस्बे के सबसे बड़ी समस्या है। चुनावी समय में अस्पताल का मुद्दा नेताओं के लिए वोट बटोरने के लिए बड़ा काम आता है। हर बार चुनावी उम्मीदवार उसका निर्माण कराने का वादा तो करते है, लेकिन अभी तक सीएचसी धरातल पर कोई भी काम नहीं दिखाई दिया।
अखिलेश जैन, कपड़ा व्यवसायी
महिलाओं को होती काफी परेशानी
कस्बें में अस्पताल न होने से यहां की महिलाओं को इलाज कराने में काफी समस्याओं को सामना करना पड़ता है। खासकर गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय बड़ी समस्याएं होती हैं। कई बार तो खुले स्थान व बस व आदि वाहन में नवजात को जन्म देने की घटनाएं सामने आई है। जल्द अस्पताल का निर्माण किया जाए जिससे महिलाओं को बेहतर इलाज मिल सके।
मंजुलता जैन
आखिर कब बनेगा अस्प्ताल
कस्बें में अस्पताल को बड़ी बहस बनी रहती है लेकिन अस्पताल बनने की समस्या अगर-मगर के जाल में उलझी रहती है। कभी जमीन चयनित कर ली जाती तो कभी अस्पताल का स्थानांतरण करने की अफवाह शुरू हो जाती है।
अमित साहू , स्थानीय निवासी