------------
बंपर खरीद, फिर भी लक्ष्य पूरा नहीं
सब हेड-- गेहूं खरीद का आंकड़ा तीन लाख मीट्रिक टन के पार
- पहली बार आठ रैक गेहूं बुंदेलखंड से बाहर भेजा गया
- मंडी में खरीद नहीं होने से बिचौलिए नहीं उठा सके लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
गेहूं की सरकारी खरीद बृहस्पतिवार से बंद हो गई। झांसी मंडल में पहली बार इतना गेहूं खरीदा गया। यहां के गोदाम भर गए तो आठ रैक गेहूं बाहर भेजा गया। मंडल में साल भर के लिए राशन के गेहूं का इंतजाम कर लिया गया है। मंडल में गेहूं की रिकार्ड खरीद के बावजूद लक्ष्य तक नहीं पहुंचा जा सका।
झांसी मंडल में गेहूं खरीद का लक्ष्य 3.80 लाख मीट्रिक टन रखा गया था।14 जून तक मंडल के झांसी जिले में 1,11,081 मीट्रिक टन, ललितपुर में 1,10,777 मीट्रिक टन और जालौन में 81.136 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। आखिरी दिन 5,200 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई। इस तरह कुल 3,08,994 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई, जो लक्ष्य के सापेक्ष 76.23 प्रतिशत है। बुंदेलखंड में गेहूं का उत्पादन इस बार इतना अधिक हुआ है कि पहली बार स्टोरेज की समस्या हो गई और मालगाड़ी के माध्यम से अन्य जिलों को गेहूं भेजा गया। गेहूं की 08 रैक (एक रैक में 32 हजार कुंतल गेहूं) बाहर भेजी गईं। इसमें वाराणसी, आजमगढ़, कानपुर और कुशीनगर जिला शामिल हैं। 08 में से 04 रैक ललितपुर और इतनी ही रैक झांसी से भेजी गईं। दरअसल, वाराणसी में गेहूं की बहुत कम खरीद हुई है। इसलिए भरपाई के लिए झांसी से रैक में भर कर गेहूं भेजा गया। स्टोरेज की समस्या और मानसून की संभावना को देखते हुए गेहूं खरीद का समय नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया गया। बता दें कि इससे पहले 2012 में सर्वाधिक 2.37 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी।
इनसेट
-------
काम कर गई रणनीति
गेहूं की बंपर खरीद के पीछे गल्ला मंडी में गेहूं की नीलामी बंद रखने का असर पड़ा है। गल्ला मंडी में दिन में दो बार किसी भी अनाज को बेचने के लिए बोली लगाई जाती है। शुरूआत में गेहूं की बोली 14 सौ रुपये प्रति क्विंटल से अधिक नहीं लग रही थी, इससे अफसरों को लगता था कि गेहूं की खरीद नहीं हो पाएगी। इसके बाद गल्ला मंडियों में गेहूं की नीलामी रोक दी गई। कुछ आढ़तिया निर्धारित रेट 1,625रुपये प्रति क्विंटल से काम दामों पर गेहूं खरीद रहे थे। इसके बाद मंडी में गेहूं की खरीद रोक दी गई और प्राइवेट आढ़तियों के दो लाइसेंस निरस्त किए गए। इसका असर यह हुआ कि आढ़तियों ने हाथ खींच लिए और सरकारी केंद्रों पर बड़े पैमाने पर गेहूं पहुंचने लगा।
बिचौलियों के मंसूबों पर फिरा पानी
किसानों को गेहूं खरीद के बाद भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से भेजा गया, इससे किसानों को पैसे के लिए बिचौलियों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। किसानाें ने गेहूं बेचने के लिए सरकारी केंद्रों को भरोसेमंद माना।
ललितपुर का गेहूं नहीं गया मध्यप्रदेश
ललितपुर जिला मध्यप्रदेश के बार्डर पर है। मध्य प्रदेश में किसानों को गेहूं बेचने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती थी तथा उन्हें पैसे के लिए चक्कर नहीं लगाने पड़ते थे। इस कारण किसान मध्यप्रदेश में गेहूं बेचने जाते थे। लेकिन, अबकी बार उन्हें यहीं सभी सुविधाएं मिलीं। इस कारण किसानों ने मध्यप्रदेश का रुख नहीं किया।
कोट --
------
अब सरकारी खरीद बंद
गेहूं की खरीद के लिए बृहस्पतिवार को आखिरी दिन था। खरीद प्रक्रिया बंद हो गई है। करीब 76.23 प्रतिशत गेहूं की खरीद हुई है, जो अब तक का रिकार्ड है। अब गेहूं को बरसात से बचाने के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है।
- हरनाम सिंह
संभागीय खाद्य नियंत्रक