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साठ साल से कागजों पर चल रहीं थीं सहकारी समितियां, निलंबन

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कागजों में चल रही थीं समितियां - फोटो : ???? ????
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साठ साल से कागजों पर चल रहीं थीं सहकारी समितियां, निलंबित
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झांसी। एक ओर सरकार सहकारी समितियों के जरिए किसानों को उन्नत बनाने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी जिले में सहकारी समितियां कागजों पर दौड़ रही हैं। जिले में 13 समितियां ऐसी सामने आई हैं जिनका कोई वजूद ही नहीं है। इन समितियों के पते पर न तो कोई कार्यालय मिले और न ही कोई चुनाव और आडिट किया गया। इसे लेकर उप आयुक्त सहकारिता ने सभी समितियों को निलंबित कर दिया है। समितियों के सचिव और पदाधिकारियों को अभिलेख, धनराशि और बही जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जिले में बीते दिनों सहकारिता विभाग ने सहकारी समितियों की जांच कराई, तो 13 समितियां ऐसी पाई गईं, बीते 60 साल से कागजों पर चल रहीं थीं। जांच में सामने आया कि नौ समितियों के पते पर कोई कार्यालय ही नहीं था। जबकि चार समितियों में सालों से न तो कोई चुनाव हुआ। साथ ही कोई ऑडिट भी नहीं कराया गया। इसे लेकर विभाग की ओर से समितियों को कारण बताओे नोटिस दिए गए, लेकिन किसी समिति के पदाधिकारी ने कोई जवाब नहीं दिया। इस पर उप आयुक्त उदयभानु सिंह ने समितियों का निलंबन कर दिया है। साथ ही समिति के सचिव और पदाधिकारी को सभी अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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इन समितियों का नहीं मिला कार्यालय और पंजीकरण वर्ष
समाज सहकारी समिति ब्रह्मनगर 1959, आदर्श संयुक्त सहकारी समिति मगरौरा 1965, मंगूसा संयुक्त सहकारी समिति 1964, जनता संयुक्त सहकारी समिति सराय 1964, लावन कॉपरेटिव फार्मिंग सोसाइटी 1954, इमिलिया संयुक्त सहकारी समिति 1964, मगरौरा संयुक्त सहकारी समिति 1964, प्रकाश संयुक्त सहकारी समिति भौराघाट मोंठ 1964, सराय सामूहिक सहकारी समिति सराय पूंछ 1963
इन समितियों पर नहीं हुए कोई काम
सारन सहकारी समिति सारन 1964, सेना सहकारी समिति सेना 1964, बामौर सहकारी समिति बामौर 1960, नुनार संयुक्त सहकारी समिति 1964
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