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Jhansi News: 12 दिन में सर्पदंश के 52 रोगी मेडिकल कॉलेज पहुंचे

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- बारिश की वजह से मेडिकल कॉलेज में बढ़ी सर्पदंश के रोगियों की संख्या
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बारिश के चलते 12 दिन के अंदर सर्पदंश के मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पांच बच्चों समेत 52 रोगी पहुंचे। इसके अलावा सर्पदंश के पांच पीड़ित ऐसे भी पहुंचे, जिन्हें काफी देर से अस्पताल लाया गया। सांप के काटने के बाद परिजन घंटों झाड़-फूंक कराते रहे। इसके बाद हालत बिगड़ने पर वे अस्पताल लेकर भागे, लेकिन उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
पृथ्वीपुर में एक व्यक्ति को सांप ने डस लिया। परिजन उसे उपचार कराने के बजाय झाड़-फूंक कराने एक मंदिर ले गए, जहां करीब चार घंटे तक उपचार कराया। जब उसकी हालत बिगड़ गई तो परिजन मेडिकल कॉलेज लेकर आए। डॉक्टर जब तक उसका उपचार शुरू करते तब तक उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिजन पोस्टमार्टम कराए बगैर ही शव को ले गए। वहीं, मुस्तरा में खेत में धान की रोपाई करते समय एक मजदूर को सांप ने डस लिया। मौके पर मौजूद लोगों ने सांप का वीडियो बनाया, जिसे लेकर मेडिकल कॉलेज आए। जहां चिकित्सकों ने भर्ती करके उपचार शुरू किया। वहीं, मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड के अनुसार एक से 12 जुलाई तक मेडिकल कॉलेज में पांच बच्चों समेत 51 सर्पदंश रोगियों का उपचार किया गया है।
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0- हार्ट अटैक से भी हो जाती है मौत
मेडिकल कॉलेज की ईएमओ डाॅ. राजकुमार राणा ने बताया कि सर्पदंश के कई रोगियों की मौत घबराहट की वजह से हार्ट अटैक होने से हो जाती है। यदि परिवार के सदस्य रोगी के आसपास शांति का माहौल रखते हैं, तो उसके रिकवरी (स्वास्थ्य में सुधार) तेजी से होती है।





0- बारिश में यह सावधानी है जरूरी
घर के आसपास कूड़ा-कचरा जमा नहीं होने दें
खेत जाते समय जूते पहनें, एक डंडा लेकर चले
रात के समय टॉर्च साथ लेकर ही जाएं
पुरानी वस्तुओं को नहीं छुएं। खंडहरों, ईंटों के ढेर से दूर रहें
सर्पदंश करने वाले सांप की प्रजाति का पता चले तो डॉक्टर को जरूर बताएं

0- सांप के डसने पर यह करें
- अति आवश्यक है कि घबराएं नहीं और शांत रहें
- सर्प दंश का अंग स्थिर रखें। हिलने-डुलने से बचे
- तुरंत हॉस्पिटल में जाकर चिकित्सा सहायता लें
- झाड़-फूंक व घरेलू उपचार में समय बर्बाद न करें
- सर्प दंश वाले भाग के ऊपर हल्के से कपड़ा या पट्टी बांधें
- सर्प दंश की जगह पानी से धोएं ताकि संक्रमण नहीं फैले

0- डॉ. आदित्य नारायण, विभागाध्यक्ष जंतु विज्ञान विभाग बीयू
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