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आज से होगी मगफिरत की बारिश

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पहला अशरा खत्म, दूसरा आज से
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झांसी। रमजान को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत का खत्म हो गया। अब दूसरा अशरा जुमा से शुरू होगा। जुमा का नमाज के बाद लोग मगफिरत की दुआ मांगेंगे। इसके अलावा मस्जिदों में मुल्क में अमनों अमान, भाईचारा, अच्छी बारिश, बीमारों को शिफा, बेरोजगारों को रोजगार की भी दुआएं मांगी जाएंगी।
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रमजान तीस दिन का होता है। इस महीने को तीन अशरों में बांटा गया है। पहले रोजे से दसवें रोजे तक पहला अशरा, ग्यारहवें रोजे से बीसवें रोजे तक दूसरा व इक्कीसवें रोजे से तीसवें रोजे तक तीसरा अशरा होता है। दस रोजों के पूरे होते ही मुकद्दस रमजान का पहला अशरा बृहस्पतिवार को मुकम्मल हो गया। जुमा से माहे रमजान का दूसरा अशरा शुरू हो गया है। दूसरे अशरे को मगफिरत का अशरा कहा जाता है। इस अशरे में रोजेदार रोजे रखकर अल्लाह से अपने गुुनाहों की माफी व तौबा करते हैं। अल्लाह को भी रोजेदारों की दुआ को कबूल करते हैं। इस्लामी मान्यता के अनुसार दूसरा अशरे में लोग इबादत के साथ ही अपने गुनाहों से माफी पा सकते हैं। अगर कोई इंसान रमजान के दूसरे अशरे में अपने गुनाहों की माफी मांगता है, तो दूसरे दिनों के मुकाबले में इन दिनों में अल्लाह अपने बंदों की तौबा जल्द ही स्वीकार कर लेता है। मुफ्ती साबिर कासमी ने बताया कि ये अल्लाह की तरफ से इनाम है। दूसरे अशरे की दुआ कसरत से पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस्तगफार के तीन फायदे हैं। पहला कि इस्तगफार करने से तंगी और परेशानी से निजात मिलती है। दूसरा गम और तनाव से दूरी बनी रहती है। इससे रिस्क में बरकत बनी रहती है।
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