बचाव ही डेंगू का उपाय
झांसी। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में डेंगू से बचाव पर लोगों को जागरूक करने के लिए 16 मई बृहस्पतिवार को डेंगू दिवस मनाया जाएगा। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुशील प्रकाश ने कहा कि जिले की सभी स्वास्थ्य इकाइयों सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर जागरूकता कार्यक्रम होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में समूह चर्चा के साथ - साथ पम्पलेट्स द्वारा डेंगू के लक्षण, कारण, बचाव एवं इलाज संबंधी जानकारी दी जाएगी। बचाव ही डेंगू से बचने का उपाय है।
इस संबंध में हुई बैठक में उन्होंने बताया कि घर के आस पास इकठ्ठा पानी को साफ करें, ताकि इस बीमारी से लोग बचे। जिला मलेरिया अधिकारी आर के गुप्ता ने बताया कि जब मौसम गर्मी का हो तो ऐसे में संक्रामक बीमारियां मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू, फाइलेरिया जापानी इनसेफ़लाइटिस आदि फैलने की संभावना बढ़ जाती है और इन बीमारियों के फैलाने का कारण मच्छर होते हैं। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में 10 बेड का डेंगू वार्ड बनाया गया है, जहां पर मच्छरदानी लगाई है। उन्होंने बताया कि मलेरिया एवं फाइलेरिया से ग्रसित मरीजों के इलाज के लिए दवा है जबकि डेंगू की कोई स्पेशल दवा नहीं है, इसलिए बचाव ही इसका इलाज है।
क्या कहते हैं आंकड़े
वर्ष 2014 में जनपद में डेंगू के 02 मरीज पाए गए। इसके अलावा 2015 में 58, 2016 में 106, 2017 में 08 तथा 2018 में 188 मरीज डेंगू से ग्रसित थे। वहीं इस वर्ष जनवरी से 14 मई तक 2 मरीज डेंगू से ग्रसित पाए गए। सभी मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर मुफ्त इलाज किया गया है।
क्या हैं डेंगू के लक्षण
डेंगू के मरीज को सर्दी लगकर तेज बुखार आना, घबराहट होना, आँखों के पीछे दर्द होना, सांस लेने में तकलीफ होना, उल्टी होना शरीर जोड़ों व पेट में दर्द होना शुरू हो जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे मरीज की प्लेटलेट्स कम होने लगती है जिससे उसके नाक व मुंह से खून आना चालू हो जाता है और साथ ही पीठ व भुजाओं पर लाल दाने निकलने लगते हैं। इसके बाद की स्थिति में पल्सरेट बढ़ने लगती है, शरीर में कमजोरी आने लगती है तथा अचानक से बेहोशी आने लगती है।
ऐसे करें बचाव
मच्छरों से छुटकारा पाने के लिए इकट्ठा पानी को प्रत्येक सप्ताह निकालकर अच्छे से साफ करें। वहीं दिन में फुल आस्तीन के कपड़े एवं मोजे का उपयोग करें। रात्रि में मच्छरदानी का प्रयोग करें। खासतौर से संक्त्रस्मित व्यक्ति को मच्छरदानी में ही सुलाना चाहिए जिससे मच्छर संक्त्रस्मित व्यक्ति को काटकर किसी स्वस्थ व्यक्ति को संक्त्रस्मित न कर सकें।