फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली से परेशान आशाऐं

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
भुगतान न होने पर आशाओं का प्रदर्शन

झांसी। महिला अस्पताल प्रशासन पर लचर कार्यप्रणाली का आरोप लगाते हुए बुधवार को आशाओं ने प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि प्रसव के बाद आशाओं के नाम दर्ज नहीं किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम (एनएचएम) के अंतर्गत जिले में 1312 कार्यरत हैं। इसमें शहरी क्षेत्र में 116 व ग्रामीण क्षेत्र में 1196 आशाएं कार्य कर रही हैं। इनका मुख्य कार्य एनएचएम के अंतर्गत दी जा रहीं स्वास्थ्य संबंधित सुविधाओं, जानकारी व लाभ को लोगों तक पहुंचाना है। गर्भावस्था के समय महिलाओं की काउंसलिंग, सुरक्षित प्रसव, ब्रेस्ट फीडिंग के अलावा प्रसव आशाओं द्वारा कराया जाता है। इसके एवज में आशाओं को प्रसव के दौरान 400 रुपये व दो बच्चे होने पर नसबंदी कराने पर 1000 रुपये अदा किए जाते हैं लेकिन आशाओं को भुगतान नहीं हो रहा है। बुधवार को आशाओं ने महिला अस्पताल में प्रदर्शन किया। इस दौरान आशाओं ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन के व्यवहार से उन्हें परेशानी हो रही है। आशाएं मरीज को अस्पताल तक लाकर इलाज व काउंसलिंग कराती हैं लेकिन प्रसव हो जाने पर अस्पताल प्रशासन उनके नाम से प्रसव को दर्ज नहीं कर रहा है। इससे आशाओं को भुगतान नहीं हो पा रहा है। वहीं, अस्पताल की प्रभारी सीएमएस ने बताया कि अस्पताल में प्रसव के तुरंत बाद आशाओं को उनके नाम पर ही चढ़ा दिया जाता है।
विज्ञापन



पहले आशाओं को कोई भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता था लेकिन कुछ दिनों से अस्पताल प्रबंधन आशाओं के साथ अभद्र व्यवहार कर रहा है। इससे आशाओं को आर्थिक व मानसिक क्षति हो रही है। - सावित्री कुशवाहा, आशा

अस्पताल प्रशासन का आचरण आशाओं के प्रति गलत है, जिससे आशाओं को उनकी मेहनत का भुगतान नहीं हो पा रहा है। कई बार शिकायतों के बाद भी अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। - ज्योति, आशा

हर आशा ईमानदारी से अपने कार्य का अंजाम दे रही है। अस्पताल प्रबंधन की लचर व्यवस्था के चलते आशाओं के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है, जिससे सभी आशाएं काफी परेशान हो रही हैं। - खुशबू, आशा
विज्ञापन


दिन-रात लगातार मेहनत करने के बाद प्रसूता के प्रसव पर आशा को मात्र चार सौ रुपये का भुगतान होता है। उसमें भी अस्पताल प्रबंधन रुकावट बन रहा है, जिससे आशा पूरी तरह से निराश हो गई हैं। - रिजवाना, आशा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें