अन्य केंद्रों के ध्यानार्थ
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पटरियों पर पसीना बहाने वाले ही भत्ते के हकदार
- रेल प्रशासन ने ऑफिस में काम करने वाले ट्रैकमैनों के भत्तों पर लगाई रोक
- अभी दूसरे मंडलों में नहीं है यह व्यवस्था, कर्मचारियों में रोष
मुकेश साहू
झांसी।
रेल पटरियों पर पसीना बहाने वाले ट्रैकमैन ही अब भत्ते (एलाउंस) लेने के हकदार होंगे। इनके कार्य को लेकर रेल प्रशासन ने नजरिया बदल दिया है। रेल प्रशासन ने तय किया है कि पटरियों पर काम करने वाले कर्मचारियों को ही हार्ड ड्यूटी एलाउंस मिलेगा। यह नियम लागू कर दिया गया है। हालांकि, दूसरे मंडलों में अभी यह नियम लागू नहीं है।
रेल मंडल में तमाम ट्रैकमैन स्वयं की प्रार्थना पर पटरियों पर काम करने की जगह कार्यालय में ड्यूटी कर रहे हैं। इन कर्मचारियों को 2700 रुपये हार्ड ड्यूटी एलाउंस मिलता है। इनके कार्य को लेकर रेल प्रशासन ने नजरिया बदल दिया है। रेल प्रशासन का मानना है कि पटरियों पर काम करने वाले कर्मचारियों को ही हार्ड ड्यूटी एलाउंस मिलना चाहिए। जबकि, कार्यालय में काम कर रहे ट्रैकमैन आराम की नौकरी करते हैं। ऐसे में पटरियों पर काम करने वाले कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। इस आधार पर कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारी हार्ड ड्यूटी एलाउंस के हकदार नहीं हैं। पटरियों पर काम करने वाले ट्रैकमैन भी इस व्यवस्था से नाराज हैं और वह इस संबंध में शिकायत भी कर चुके हैं।
इसी आधार पर रेल प्रशासन ने नवंबर से कार्यालय में काम करने वाले ट्रैकमैन के हार्ड ड्यूटी एलाउंस पर रोक लगा दी है। साथ ही, इन कर्मचारियों को फील्ड ड्यूटी से जुड़े भत्ते, राष्ट्रीय अवकाश, नाइट ड्यूटी एवं सेक्शन के यात्रा भत्तों का भी लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, रेल प्रशासन के इस निर्णय से कार्यालयों में काम कर रहे ट्रैकमैनों में रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि अफसरों के कहने पर ही उनको कार्यालय ड्यूटी पर लगाया जाता है। रेलवे बोर्ड से भी इस पर कोई गाइड लाइन नहीं आई है। दूसरे मंडलों में भी यह व्यवस्था नहीं है। जबरन इस आदेश को लागू किया जा रहा है।
‘रेल पटरियों पर काम करने वाले ट्रैकमैनों के साथ न्याय नहीं हो रहा था। इसी कारण रेल प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। इसी माह से इस नियम का पालन शुरू हो गया है।’
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।