बुंदेलखंड के अन्य जिलों के ध्यानार्थ
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बुंदेलखंड में कल उगेगा औद्योगिक विकास का ‘सूरज’
- इंवेस्टर्स समिट में बुंदेलखंड के सात जिलों के छह सौ प्रतिनिधि आएंगे
- डिफेंस कॉरिडोर, पर्यटन, फूड प्रोसेसिंग और सौर ऊर्जा पर रहेगा फोकस
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड इंवेस्टर्स समिट नौ जून को पैरामेडिकल कॉलेज के आडीटोरियम हॉल में होगी। समिट में बुंदेलखंड के सात जिलों से छह सौ उद्यमियों और उनके प्रतिनिधियों के आने की संभावना है। समिट में पर्यटन, डिफेंस कॉरिडोर, फूड प्रोसेसिंग, स्टोन क्रशर उद्योग, आईटी सेक्टर व सौर ऊर्जा क्षेत्र पर फोकस रहेगा। केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना, जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव, यूपी के चैंबर्स के अध्यक्ष और सचिव शामिल होंगे।
सुबह दस बजे से होने वाली समिट में औद्योगिक नीति, बुंदेलखंड में कृषि आधारित उद्योगों की संभावनाएं और पर्यटन विकास की संभावनाओं पर चर्चा होगी। प्रदेश के एमएसएमई के मुख्य सचिव भवुनेश कुमार, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास आयुक्त डा. अनूप चंद्र पांडेय उद्यमियों को संबोधित करेंगे। इनके अलावा सेना के ब्रिगेडियर आशीष भट्टाचार्य, औद्योगिक विकास के विशेष सचिव अंतिक अग्रवाल समेत अन्य अधिकारियों के आने की संभावना है। समिट की तैयारियों में कोई कमी न रहे, इसलिए जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी ने पैरामेडिकल कालेज, शहर के प्रमुख मार्ग और चौराहों पर सफाई कराने, जनप्रतिनिधियों और उद्योगों के प्रतिनिधियों की सुरक्षा करने, पेयजल के लिए टैंकर भिजवाने समेत अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
निवेश के लिए बनाना है बेहतर माहौल
बुंदेलखंड चैंबर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष हरीमोहन बंसल ने बताया कि इंवेस्टर्स समिट में बुंदेलखंड में उद्यमियों को निवेश के लिए बेहतर माहौल देने पर निर्णय लिए जाने की संभावना है। अभी उप्र में यूपीएसआईडीसी द्वारा औद्योगिक क्षेत्र की दरें मध्य प्रदेश की तुलना चार गुना अधिक हैं, बिजली की दरें भी मप्र की तुलना में दो रुपये प्रति यूनिट अधिक हैं। इससे उद्यमी मप्र में उद्योग लगाना ज्यादा अच्छा मानता है। इसमें बदलाव की जरूरत है। यहां पर पांच सौ से अधिक स्टोन क्रशर हैं, लेकिन खदानों के पट्टों का वर्षों से नवीनीकरण नहीं हुआ है। इससे क्रशर बंद होने की कगार पर हैं। यदि गुजरात सरकार की तर्ज पर नीलामी प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही खदानों के पट्टे नवीनीकृत कर दिए जाएं तो स्टोन क्रशर बंद नहीं होंगे। इन मुद्दों पर समिट में चर्चा होगी।
इन जिलों के प्रतिनिधि आएंगे
बुंदेलखंड के झांसी, जालौन, ललितपुर, बांदा, हमीरपुर, जालौन और चित्रकूट के जिलाधिकारी, उद्योग विभाग के अधिकारी और उद्यमी आएंगे।
ये है उद्देश्य
पहली बार हो रहे बुंदेलखंड इंवेस्टर्स समिट का उद्देश्य है कि बुंदेलखंड में मटर, टमाटर, हल्दी, अदरक, तिलहन, दलहन पर आधारित उद्योगों की स्थापना की जाए। बुंदेलखंड में जड़ी-बूटियां, तेंदू पत्ता और बांस उपलब्ध है, गोपालन से पर्याप्त गोबर उपलब्ध रहता है। इस पर आधारित आयुर्वेदिक दवा उद्योग पनप सकता है, इसलिए गोबर और गोमूत्र से बनने वाली दवाओं पर टैक्स नहीं लगाने के बिंदु पर चर्चा होगी। खनिज संपदा के रूप में ग्रेनाइट, डायस्पोर, पैराफ्लाइट, मौरंग और बालू पर्याप्त है, इन पर आधारित उद्योग लगाने, रक्षा विभाग द्वारा 143 उत्पादों पर छोटे-छोटे उद्योगों की स्थापना करने तथा कृषि उपज पर आधारित उद्योगों की स्थापना की संभावनाओं को देखते हुए इन बिदुंओं पर कोई निर्णय निकलने की संभावना है।
इन मुद्दों पर भी होगी चर्चा
- गेल की गैस पाइप लाइन गुना से झांसी होकर निकलती है। पाइप लाइन की गैस का उपयोग आगरा और फिरोजाबाद की औद्योगिक इकाइयों द्वारा किया जाता है। झांसी में गैस का उपयोग क्यों नहीं हो पा रहा है।
- दस एकड़ में फैला उद्योग विभाग का चीनी पात्र विकास केंद्र कोछाभांवर 25 साल से बंद पड़ा है, इसे शुरू करने में क्या कठिनाई आ रही है।
- 1972 में 80 एकड़ जमीन पर शुरू हुई सूती मिल 25 साल से बंद चल रही है। जमीन पर भूखंड तैयार कर नए उद्योग स्थापित करने के लिए उद्यमियों को आवंटित करने में क्या कठिनाई आ रही है।
- झांसी मुख्यालय के आसपास अधिकांश जमीन बंजर है और ग्राम समाज की है। यह जमीन चिह्नित कर उद्यमियों को आवंटित की जाए, ताकि नए उद्योगों की स्थापना हो सके। आने वाली कठिनाइयां दूर की जाएं।
इंवेस्टर्स समिट में प्रदेश की औद्योगिक नीति पर चर्चा होगी। बुंदेलखंड खासकर झांसी में एक से दो करोड़ रुपये लगाकर उद्योग शुरू करने वाले तमाम लोग हैं। यदि ऐसे व्यक्ति आगे आते हैं तो बुंदेलखंड का औद्योगिक विकास होगा। इसी मकसद से इंवेस्टर्स समिट का आयोजन हो रहा है।
- सुधीर कुमार श्रीवास्तव, उपायुक्त उद्योग