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तीन शताब्दी बाद बदलेगा कुली का नाम
लाल की जगह नीली ड्रेस में दिखेंगे, सहायक कहलाएंगे
झांसी जंक्शन पर तैना है 188 कुली
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
तीन शताब्दी बाद कुली का नाम बदला जाएगा। इनकी नई पहचान अब सहायक के रूप में होगी। नाम ही नहीं इनकी वर्दी भी लाल की जगह नीली होगी। बंदरगाहों पर समान उठाने वालों के लिए 1727 में पहली बार अधिकारिक रूप से कुली शब्द का इस्तेमाल किया गया था। झांसी जंक्शन में 188 कुली तैनात हैं।
लाल कपड़े पहले हाथ में बिल्ला बांध कर सामान ढोने वाले कुली अब जल्द ही रेलवे स्टेशन पर नई पहचान के साथ नजर आएंगे। नए नाम और वर्दी के साथ यात्रियों का बोझ उठाने में भी रेलवे भी इनकी मदद करेगा। एयरपोर्ट की तर्ज पर यह ट्रॉली से सामान ले जाते दिखेंगे। देश के सभी स्टेशनों पर तैनात कुलियों का ब्यौरा रेनवे ने मांगा है। सुविधाओं के नाम पर अभी तक स्टेशन के बाहर सिर्फ कुली विश्रामालय बना हुआ है।
फोटो.... कुली बोले
सहायक बनना अच्छी बात
हम लोग सहायक बन जाएं, यह अच्छी बात है। लेकिन उससे अच्छी बात हमारी समस्या दूर होना है।
उधेश शर्मा, कुली
कमाई भी तो बढ़नी चाहिए
सहायक बनने से क्या फायदा, कमाई थोड़े बढ़ेगी। रुपया तो उतना ही मिलेगा, जितनी मेहनत होगी।
रशीद अहमद, कुली
बजट में हुई थी घोषणा
कुलियों को सहायक बनाने की घोषणा बजट में हुई थी। इसके बाद से सभी को जल्द सहायक बनाने की तैयारी है। इनकी ड्रेस भी बदली जाएगी।
नीरज भटनागर
प्रभारी पीआरओ/डीसीएम