-------
गुपचुप चुनाव की खुली ‘पोल’, प्रभारी बदले
- कांग्रेस के प्रदेश चुनाव अधिकारी को भेजे गए दो सौ से अधिक व्हाट्सऐप मेसेज
- घर बैठे चुनाव अधिकारी बनाने की हुई थी शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
कांग्रेस पार्टी में चल रहे संगठनात्मक चुनाव को गुपचुप तरीके से मनमाफिक कराने की कोशिशों को झटका लगा है। पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायत पर प्रदेश चुनाव अधिकारी ने जिला निर्वाचन अधिकारी मंजीत सिंह सलूजा को बदल दिया है। अब उनके स्थान पर सैय्यद मकसूद अली को जिला निर्वाचन अधिकारी की कमान सौंपी है। वह जल्द झांसी आएंगे और संगठन में चल रही गतिविधियों का जायजा लेंगे।
कांग्रेस संगठन के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। पार्टी की राजनीतिक विरासत को फिर से वापस लाने की कोशिशों के क्रम में नेतृत्व चाहता है कि संघर्ष करने वाली लीडरशिप उभरे, ताकि दूसरे दलों से दो-दो हाथ कर फिर से पार्टी को ताकतवर बनाया जा सके। इसके लिए पहले जमीनी स्तर पर काम करने वालों को पार्टी की सदस्यता बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। सदस्यता के बाद अब सभी ब्लाकों और शहर के संगठनात्मक चुनाव की तैयारी चल रही है। पार्टी ने चुनाव अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी थी कि किसी भी जिले से ऐसी खबरें नहीं आएं कि गुपचुप तरीके से चुनाव करा लिए गए, क्योंकि राहुल गांधी की मंशा है कि ऐसा संगठन तैयार हो, जो पार्टी के लिए संघर्ष कर सके।
पार्टी के जिला निर्वाचन अधिकारी को जिला और शहर कमेटी के चुनाव के लिए ब्लाक निर्वाचन अधिकारी (बीआरओ) बनाने थे। वह दो बार झांसी आए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने ऐसे कार्यकर्ताओं के नाम ब्लाक निर्वाचन अधिकारी के तौर पर तय कर दिए थे, जिनका नाम स्थानीय कार्यकर्ता भी नहीं जानते हैं। इसकी भनक पार्टी के कुछ नेताओं को मिली तो इसकी शिकायत व्हाट्सऐप पर प्रदेश चुनाव अधिकारी से की। एक या दो नहीं, बल्कि दो सौ से अधिक कार्यकर्ताओं ने शिकायत भेजी। इतना हीं नहीं, कुछ नेताओं ने तो प्रदेश निर्वाचन अधिकारी के अलावा पार्टी हाईकमान तक को शिकायत भेजी। इसकी जानकारी हाईकमान को मिलने पर चुनाव अधिकारी मंजीत सिंह सलूजा बैकफुट पर आ गए और हाईकमान ने उनके स्थान पर मध्यप्रदेश के सैय्यद मकसूद अली को जिला निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी सौंप दी है। वह जल्द झांसी आएंगे और संगठन की नब्ज टटोलेंगे।
कौन हैं यह चुनाव अधिकारी?
सूत्रों के अनुसार पूर्व में जिन कार्यकर्ताओं के नाम ब्लाक चुनाव अधिकारी के तौर पर भेजे गए थे, उनमें आरसी खरे और असद उल्ला खां के नाम शामिल हैं। यह नाम ऐसे हैं, जिन्हें कांग्रेस कार्यकर्ता स्वयं नहीं जानते।