झांसी। नगर निगम को पिछले कई महीनों से अवस्थापना निधि नहीं मिली है। इसके अलावा स्थायी फंड इकट्ठा करने की रफ्तार भी धीमी है। इससे महानगर में विकास की रफ्तार मंद पड़ गई हैं। छोटे-बड़े कामों की लगभग पांच सौ फाइलें अटकी पड़ी हुईं हैं। जबकि, चुनाव नजदीक होने की वजह से हर वार्ड से काम की दरकार आ रही है।
नगर निगम को प्रत्येक तिमाही में सात से आठ करोड़ रुपये की अवस्थापना निधि मिलती थी। इस राशि का उपयोग महानगर के विकास के कामों में किया जाता था। खासतौर पर बुनियादी सुविधाओं का विकास इस बजट से किया जाता था। लेकिन, पिछली तीन तिमाही से नगर निगम इस राशि से वंचित बना हुआ है।
इसके अलावा गृहकर वसूली की रफ्तार धीमी होने की वजह से स्थानीय फंड भी ज्यादा जमा नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा प्रभाव विकास कार्यों पर पड़ा है। बजट की कमी की वजह से वार्डों में सड़क, नाली जैसे भी कई काम अटके हुए हैं। इसके अलावा बड़ी सड़कों की मरम्मत में भी बजट की कमी आड़े आ रही है।
अगले माह निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में पार्षदों की ओर से उनके वार्डों में काम कराने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है। लगातार प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। सभी का दबाव है कि चुनावी आचार संहिता लागू होने से पहले उनके क्षेत्र के कार्यों को मंजूरी मिल जाए। स्थिति का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि नगर निगम में छोटे-बड़े विकास कार्यों से जुड़ीं लगभग पांच सौ फाइलें इकट्टी हो गईं हैं। यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
यह काम अटके
- खराब होने के बाद भी पुरानी की जगह नई स्ट्रीट लाइटें नहीं लग पा रही हैं।
- बारिश के बाद कई बड़ी सड़कों की मरम्मत कराई जानी थीं, पर धनाभाव में काम अटका है।
- कम्युनिटी हॉल का निर्माण किया जाना था, जिसकी शुरुआत नहीं हो पाई।
- कई वार्डों की अंदरूनी सड़कों का निर्माण भी अटका हुआ है।
- कई जगहों पर नई सड़क बनाने की जगह मरम्मत कर चलाया जा रहा है काम।
अवस्थापना निधि अभी मिल नहीं पाई है। इसके मिलते ही सभी परियोजनाओं का काम पूरा कर दिया जाएगा। हालांकि, आवश्यक सभी कार्य अब भी जारी हैं।
- पुलकित गर्ग, नगर आयुक्त