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500 बेड का अस्पताल: समय पर बन जाता तो आपदा में बहुत काम आता

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झांसी। आपदा के इस दौर में अस्पताल में पलंग हासिल करना मरीजों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। अलबत्ता, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के परिसर में 500 बेड के अस्पताल का ढांचा खड़ा हुआ है, जिस पर सरकार के खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन, समय पर निर्माण पूरा नहीं होने की वजह से ये सफेद हाथी साबित हो रहा है। जबकि, कोरोना काल में ये बेहद उपयोगी साबित होता।
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27 सितंबर 2012 को झांसी आए प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज का औचक निरीक्षण किया था। यहां मरीजों की संख्या के मुकाबले पलंग कम पाए जाने पर उन्होंने मेडिकल कॉलेज के परिसर में 500 बेड के एक अस्पताल के निर्माण की घोषणा की थी। 2014 में इसका निर्माण शुरू हुआ था, जो 2017 में पूरा होना था। निर्माण की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई थी। इसके निर्माण पर 80 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की जा चुकी है। अस्पताल की अत्याधुनिक डिजाइन बनाई गई है, जिसके तहत सभी 500 बेड तक ऑक्सीजन सप्लाई की जानी है। अस्पताल का बाहरी ढांचा पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुका है। अन्य संसाधन विकसित करने के लिए बजट नहीं मिल पाया, जिससे निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया। इन हालातों में इसके निर्माण पर अब तक खर्च की गई धनराशि व्यर्थ जाती नजर आ रही है। जबकि, समय पर इसका निर्माण पूरा हो जाता तो आपदा के इस दौर में बेहद काम आता है। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी और भाजपा के नेताओं में आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
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बुंदेलखंड के लोगों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधाएं हासिल हों, इसके लिए प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 500 बेड के अस्पताल का निर्माण शुरू कराया था। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर इसका निर्माण बंद करा दिया गया है। जबकि, इसका समय पर निर्माण पूरा करा दिया जाता तो कोरोना काल में ये बेहद काम आता है। सपा को श्रेय न मिल जाए, इसके लिए भाजपा सरकार में इसका काम पूरा नहीं होने दिया।
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- डा. चंद्रपाल सिंह यादव, पूर्व सांसद
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आपदा के इस दौर में सपाई राजनीति कर रहे हैं। जबकि, इस दौर में आम आदमी की मदद के लिए आगे आना चाहिए। रही बात 500 बेड के अस्पताल की, तो इसका निर्माण पूरा कराने में किसी भी तरह की शिथिलता नहीं बरती गई। ये पूरा ही होने वाला था कि अचानक कोरोना वायरस के संक्रमण ने हमला बोल दिया, जिससे इसके निर्माण की रफ्तार भी मंद पड़ गई है। अस्पताल के नाम पर अभी ढांचा ही बना है। चिकित्सीय सुविधाएं व स्टाफ तैयार करने में महीनों का वक्त लग जाएगा।
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- रवि शर्मा, सदर विधायक
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