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सीजीएसटी अफसर उतरे सड़क पर, व्यापारी परेशान

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सीजीएसटी अफसर उतरे सड़क पर, व्यापारी परेशान
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झांसी। केंद्रीय गुड्स एवं सर्विस टैक्स (सीजीएसटी) के अफसरों ने अब सड़क पर भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। वाणिज्य कर विभाग की तरह ही उन्होंने वाहनों पर नजर रखनी शुरू कर दी है, ताकि टैक्स चोरी पर लगाम कस सके। इसे व्यापारियों ने अपना उत्पीड़न बताया है। उनका कहना है कि सरकार को व्यापारियों को राहत देनी चाहिए थी।
केंद्रीय उत्पाद एवं सेवाकर विभाग अब केंद्रीय गुड्स एवं सर्विस टैक्स में परिवर्तित हो गया है। यहां के अफसर अभी तक बड़ी फैक्ट्रियों को अपनी जांच में निशाना बनाते थे। मगर, उन्होंने अब सड़क पर भी सक्रियता बढ़ाकर खजाने को भरना शुरू कर दिया है। शहर से गुजरने वाले और अंदर आने वाले वाहनों पर नजर रखी जा रही है। इसके लिए विभाग ने पांच सदस्यीय टीम का गठन किया है, जिसके प्रभारी अधीक्षक के के त्रिपाठी को बनाया गया है। प्रभारी अधीक्षक ने बताया कि पहले भी उनको वाहन चेकिंग का अधिकार था। साथ ही अगर कोई व्यापारी ईवे बिल पर माल मंगाकर गोदाम में रखता है और दस किलोमीटर के दायरे में इधर से उधर भेजता तो उस स्थिति में वाहन के साथ डिलेवरी चालान होना आवश्यक है। विभाग का उद्देश्य किसी का उत्पीड़न करना नहीं है। मालूम हो कि वाणिज्य कर विभाग ने भी सड़क पर वाहनों की जांच के लिए पांच इकाइयों का गठन कर रखा है। यह दल भी व्यापारियों के माल की जांच करते हैं।
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ढाई लाख रुपये जमा कराया जुर्माना
विगत नौ मार्च को सेंट्रल जीएसटी की टीम ने सहायक आयुक्त वीके मीणा कानपुर के नेतृत्व में ग्वालियर से झांसी आए एक ट्रक को इलाइट गोविंद चौराहा मार्ग पर नारायण धर्मशाला के पास जांच के लिए कब्जे में ले लिया था। भौतिक सत्यापन में हार्डवेयर के ढाई लाख रुपये के माल के साथ बिल नहीं पाए गए। सोमवार को ट्रांसपोर्टर ने सौ प्रतिशत जुर्माने के हिसाब से ढाई लाख रुपये जमा कर दिए। जुर्माना जमा होने के बाद ट्रक को छोड़ दिया गया।
अवैध कारोबारियों को दे रखा संरक्षण
महानगर की कुछ ट्रांसपोर्ट ऐसी हैं, जो टैक्स चोरी का माल लाने का काम करती हैं। यह ट्रांसपोर्टर पहले दिल्ली से माल लाकर ग्वालियर में एकत्रित करते हैं, फिर मौका पाते ही उसको झांसी ले आते हैं। इन ट्रांसपोर्ट से माल को झांसी महानगर व जिले के दूसरे हिस्सों में भेजा जाता है। अफसर भी इस बात को भलीभांति जानते हैं, लेकिन वह उनके वाहनों की जांच करने का कभी प्रयास नहीं करते। इससे अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं।


नियम के आड़ में उत्पीड़न
जीएसटी में नियम है कि अगर दस किलोमीटर के दायरे में व्यापारी अपना माल इधर से उधर ले जाता तो उसके साथ बिल की आवश्यकता नहीं है। मगर, इस नियम को अधिकारी नहीं मान रहे हैं। छोटे वाहनों को रोककर अधिकारी जांच के नाम पर उत्पीड़न कर रहे हैं।
संजय पटवारी, व्यापारी नेता।

कुछ सालों तक मिलनी चाहिए थी राहत
जीएसटी और नोटबंदी से व्यापारी अभी तक उबर नहीं पाया है। इस पर चेकिंग से व्यापारी परेशान हो रहा है। छोटी- छोटी कमियों को भी अधिकारी बड़ा बताकर उत्पीड़न करते हैं। इससे व्यापारी परेशान हैं। कुछ सालों तक तो व्यापारियों को राहत दी जानी चाहिए थी।
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अनिल बड़ौनिया, व्यापारी

बिल है तो माल की जांच क्यों?
वाहन के साथ अगर ई वे बिल है तो जांच की क्या आवश्यकता है? जांच के नाम पर अधिकारी घंटों गाड़ी को रोके रखते हैं। इससे व्यापारी का सीधा नुकसान होता है। जीएसटी में जब सभी कुछ ऑनलाइन है तो फिर व्यापारियों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए।
धर्मेंद्र अग्रवाल, व्यापारी।
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