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बुंदेलखंड एक्सप्रेस पर पथराव, तुलसी में नहीं घुस सकीं सवारियां

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बुंदेलखंड एक्सप्रेस पर पथराव, तुलसी में नहीं घुस सकीं सवारियां
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झांसी। महाशिवरात्रि पर प्रयागराज जाने वाले यात्री बुंदेलखंड एक्सप्रेस में सवार तक नहीं हो सके। गुस्साएं यात्रियों ने ट्रेन पर महोबा और अतर्रा स्टेशन पर पथराव किया। साथ ही एस वन कोच के कांच तक तोड़ दिए। आरक्षित कोचों के यात्री भी सवार नहीं हो सके। वहीं, ललितपुर स्टेशन पर तुलसी एक्सप्रेस में भीड़ बढ़ने पर यात्रियों ने चेन पुलिंग कर दी। इससे डेढ़ घंटे तक गाड़ी प्लेटफार्म पर ही खड़ी रही।
झांसी से सीधे प्रयागराज जाने के लिए बुंदेलखंड, चंबल एक्सप्रेस, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम एक्सप्रेस और तुलसी एक्सप्रेस ही उपलब्ध हैं। इनमें ग्वालियर से चलने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस व चंबल एक्सप्रेस प्रतिदिन, मुंबई से आने वाली तुलसी एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन और प्रथम स्वतंत्रता संग्राम एक्सप्रेस एक दिन चलती है। रविवार की रात बड़ी संख्या में कुंभ यात्री प्रयागराज जा रहे थे। भीड़ को देखते हुए रेल प्रशासन ने ग्वालियर से प्रयागराज के लिए एक स्पेशल ट्रेन भी चलाई थी। बावजूद इसके भीड़ कम नहीं हो सकी। बुंदेलखंड एक्सप्रेस के सभी कोच झांसी से ठसाठस भर चुके थे। स्लीपर और एसी कोच का जनरल कोच की तरह हाल था। ट्रेन के महोबा स्टेशन पहुंचने पर यात्रियों ने दरवाजे नहीं खोले। गुस्साएं यात्रियों ने एस वन कोच की एक खिड़की का कांच तक तोड़ दिया। पटरियों की तरफ खड़े यात्रियों ने पथराव किया। आरक्षित कोच के यात्री तक सवार नहीं हो सके। आरपीएफ और जीआरपी ने मुश्किल से ट्रेन को आगे बढ़ाया। अतर्रा रेलवे स्टेशन पर भी ऐसी ही स्थिति बनी रही, इससे ट्रेन लेट होती गई। यह गाड़ी प्रयागराज सुबह नौ बजे पहुंची।
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वहीं, ललितपुर स्टेशन पर तुलसी एक्सप्रेस में भीड़ अधिक होने पर यात्रियों ने बार-बार चेन पुलिंग की। जीआरपी और आरपीएफ ने किसी तरह यात्रियों को समझाबुझाकर बिठाया। ट्रेन डेढ़ घंटे बाद प्लेटफार्म से रवाना हो सकी।
यात्रियों को नहीं था कार्रवाई का डर
- भीड़ के आगे नतमस्तक रही आरपीएफ और जीआरपी
झांसी। बुंदेलखंड एक्सप्रेस पर महोबा और अतर्रा स्टेशन पर पथराव होने के बाद भी आरपीएफ और जीआरपी बेकाबू भीड़ पर कार्रवाई नहीं कर सकी। स्थिति संभालना ही उनके लिए चुनौती बना रहा।
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रेलवे एक्ट में ट्रेन पर पथराव करना जघन्य अपराध में आता है। पथराव से रेलवे संपत्ति को क्षति पहुंचने पर पांच साल तक की सजा हो सकती है। इसके बाद भी अतर्रा और महोबा स्टेशन पर आरपीएफ और जीआरपी को यात्रियों में शामिल अराजक तत्वों पर कार्रवाई करने से बचना पड़ा। दरअसल, दोनों की स्टेशनों पर भीड़ बेकाबू थी। प्लेटफार्म और पटरी दोनों तरफ यात्री कोचों में चढ़ने के लिए मशक्कत कर रहे थे। इन्हीं में कुछ अराजक यात्रियों ने पथराव किया। आरपीएफ और जीआरपी मुश्किलों से ट्रेन को आगे बढ़वा सकीं। इस मामले में आरपीएफ कमांडेंट सारिका मोहन ने कहा कि हर स्टेशन पर बुंदेलखंड एक्सप्रेस की निगरानी की जा रही थी। मगर, सभी ठहराव वाले स्टेशनों पर यात्री बेकाबू थी। यात्री डिब्बों के ऊपर बैठने तक को तैयार थे। ऐसे में आरपीएफ की पहली प्राथमिकता ट्रेन को शांतिपूर्वक आगे बढ़ाना था। अगर कोई कार्रवाई की जाती तो भीड़ बेकाबू हो सकती थी। स्थितियों को देखकर ही काम किया गया।
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