अंचलों में आज भी रेडियो की पैठ
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में विश्व रेडियो दिवस पर रेडियो की विशेषताओं पर चर्चा हुई। बताया गया कि दूर दराज के अंचलों में आज भी रेडियो की पैठ है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जनसंचार में रेडियो के महत्व, विविध प्रारूपों, दैनिक क्रियाकलापों, लक्ष्यों और उनके लिए बेहतर ढंग से कार्यक्रम तैयार करने की प्रविधियों और सावधानियों के बारे में भी बताया गया।
डीएसडब्ल्यू प्रो. देवेश निगम ने कहा कि अपनी खूबियों के कारण रेडियो आज भी बहुसंख्य जनता का पसंदीदा संचार माध्यम बना है। यह एक ऐसा माध्यम है जिसका प्रयोग हर व्यक्ति अपने दूसरे कामों को जारी रखते हुए कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से रेडियो के विविध कार्यों को अंजाम देने की सफलता हासिल कर समाज के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
डॉ. सीपी पैन्यूली ने सामुदायिक रेडियो के इतिहास और उसके विकास के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रेडियो अपनी खूबियों के कारण देश के सुदूर अंचलों तक अपनी पैठ रखता है।
कार्यक्रम में रेडियो बुंदेलखंड के प्रतिनिधि मनीष श्रीवास्तव ने अपनी संस्था की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने उन कार्यक्रमों का ब्योरा पेश किया। इसके माध्यम से वे बुंदेलखंड क्षेत्र के लोगों से उनकी मातृभाषा में संपर्क साधने में लगे हैं। उन्होंने कार्यक्रमों को तैयार करने के पूर्व किए गए प्रयासों का भी विवरण और व्यावहारिक परेशानियों के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कई कार्यक्रमों की रिकार्डिंग भी विद्यार्थियों को सुनाई। इस कार्यक्रम में राघवेंद्र दीक्षित, सतीश साहनी, अभिषेक कुमार, डॉ. उमेश कुमार उपस्थित रहे।