बीएचईएल को मिला 30 रेल इंजन बनाने का आर्डर
सब हेड... पांच सौ करोड़ के घाटे में चल रही यूनिट के आए अच्छे दिन
- चार साल से नहीं मिला था एक भी आर्डर, तीन अरब चालीस करोड़ से होगा निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) की झांसी इकाई में रेलवे के नए आर्डर ने जान फूंक दी है। रेलवे से बीएचईएल को तीन अरब चालीस करोड़ रुपये में 30 लोकोमोटिव (रेल इंजन) बनाने का ऑर्डर मिला है। पिछले चार साल से लोकोमोटिव का कोई ऑर्डर न होने की वजह से भेल को पांच अरब रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था। इससे इकाई बड़े घाटे में चली गई थी।
बीएचईएल के देश में चौदह कारखाने हैं। इनमें झांसी इकाई में ही रेल इंजन और बिजली के ट्रांसफार्मर का निर्माण किया जाता है। रेल इंजन बीएचईएल की केवल झांसी इकाई में ही बनाए जाते हैं। इसके लिए भेल कारखाने में अलग से लोकोमोटिव यूनिट है, जिसमें लगभग तीन सौ कर्मचारी कार्यरत हैं। पिछले चार साल से झांसी को रेलवे की ओर से एक भी आर्डर नहीं मिला था। इससे इस यूनिट में काम न के बराबर ही रह गया था। इस यूनिट के कर्मचारियों को ट्रांसफार्मर निर्माण कार्य तक में लगाना पड़ गया था। इससे बीएचईएल को पांच अरब रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन, अब बीएचईएल के अच्छे दिन लौट आए हैं। रेलवे की ओर से अगस्त में 30 रेल इंजन बनाने का तीन अरब चालीस करोड़ रुपये का बड़ा आर्डर मिला है।
उल्लेखनीय है कि अब तक भेल द्वारा डब्लूएजी-7 इंजनों का निर्माण किया जाता रहा है, परंतु अब रेलवे सभी नए इंजन उच्च क्षमता के डब्लूएजी-9 ही खरीद रहा है। नए इंजनों के निर्माण के लिए भेल अपनी इकाई को अपग्रेड कर रहा है।
लोकोमोटिव का है लंबा अनुभव
बीएचईएल की झांसी इकाई के पास लोकोमोटिव बनाने का लंबा अनुभव है। लेकिन, पिछले चार साल से रेलवे की ओर से बीएचईएल को एक भी आर्डर नहीं मिला था। इससे लगभग पांच सौ करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। अब रेलवे से नया आर्डर मिला है। उच्च क्षमता के डब्लूएजी-9 इंजन बनाने के लिए बीएचईएल पूरी तरह से तैयार है।
- डीके दीक्षित, कार्यपालक निदेशक, बीएचईएल
उमा की रही भूमिका
बीएचईएल की झांसी इकाई को लोकोमोटिव का ऑर्डर दिलाने में स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री उमा भारती की बड़ी भूमिका रही। उन्होंने घाटे में चल रही बीएचईएल की झांसी इकाई को बचाने के लिए रेल मंत्री, भारी उद्योग मंत्री से व्यक्तिगत स्तर पर बात की, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अन्यथा रेलवे द्वारा अपने सभी इंजनों का निर्माण चितरंजन स्थित कारखाने में ही कराया जा रहा था।