झांसी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बीमार बच्चों को चिह्नित कर उनके उपचार की व्यवस्था की जाती है। बावजूद, चालीस फीसदी बच्चे अस्पतालों तक नहीं पहुंच पाते। इसमें हीलाहवाली उनके अभिभावक ही कर जाते हैं। इस प्रवृत्ति पर अंकुश को जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को बीमार बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को अस्पताल तक लाने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बेसिक स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों की स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा मौके पर ही जांच की जाती है। यहां बीमार बच्चों को चिह्नित कर उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता है। बीमारी गंभीर होने की दशा में उन्हें जिला अस्पताल व मेडिकल कालेज के संदर्भित कर दिया जाता है। उक्त अस्पतालों में ऐसे बच्चों के नि:शुल्क उपचार की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। बच्चों को अस्पताल तक लाने की जिम्मेदारी उनके अभिभावकों की होती है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा जिले के आठों ब्लाकों के स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में इस साल अब तक 8,778 बीमार बच्चे चिह्नित किए जा चुके हैं। इनमें से 6,819 बच्चों को मौके पर ही उपचार उपलब्ध करा दिया गया। जबकि, 2,059 बच्चों को जिला अस्पताल व मेडिकल कालेज इलाज के लिए संदर्भित किया गया। लेकिन, इनमें से चालीस फीसदी बच्चे अस्पताल की दहलीज तक नहीं पहुंच पाए, जिससे उनकी बीमारी का इलाज भी नहीं हो सका।
इस स्थिति पर जिलाधिकारी अनुराग यादव ने गहरा असंतोष जताया है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि बीमार बच्चों के अभिभावकों के मोबाइल नंबर एकत्र कर उनसे संपर्क किया जाए। बीमार बच्चों को अस्पताल तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि उन्हें समुचित इलाज मिल सके।
मऊरानीपुर में सबसे ज्यादा बीमार बच्चे
झांसी। जिले में चिह्नित 8,778 बीमार बच्चों में सर्वाधिक मऊरानीपुर ब्लाक में 1,834 हैं। इसके अलावा बड़ागांव में 1,647, चिरगांव में 1,505, बबीना में 1,171, मोंठ में 1,027, बंगरा में 992, बामौर में 465 तथा गुरसरांय विकासखंड में 257 बीमार बच्चे चिह्नित किए गए हैं।