38 हजार किसानों को नहीं मिला बीमा पोर्टल खोलने के लिए शासन को भेजा गया पत्र अमर उजाला ब्यूरो झांसी। प्रधानमंत्री फसल बीमा में खरीफ सीजन के दौरान खराब हुई फसल का बीमा अब तक 38 हजार किसानों तक नहीं पहुंचा। कृषि विभाग ने इस संबंध में शासन को पत्र भेजा है। कृषि अफसरों के मुताबिक पोर्टल खुलने पर किसानों की समस्या सुलझ सकेगी। पिछले खरीफ सीजन में करीब दो लाख किसानों ने बीमा कराया था। बैंकों ने इनका प्रीमियम दो फीसदी प्रति हेक्टेयर की दर से काटकर बीमा कंपनी को भेज दिया लेकिन, करीब 38 हजार किसान ऐसे सामने आए जिनका प्रीमियम काटने के बावजूद बैंकों ने उनका पैसा बीमा कंपनियों को नहीं दिया। जब हजारों किसानों के खाते में बीमा की रकम नहीं पहुंची तब पड़ताल शुरू हुई। प्रथम दृष्टया गड़बड़ी बैंकों की ही सामने आई है। मालूम चला कि इन किसानों के नाम केंद्रीय बीमा पोर्टल पर तयशुदा समय तक अपलोड ही नहीं किए गए। इसकी आड़ में बीमा कंपनी ने इन सभी के दावे खारिज कर दिए। अब इतनी बड़ी संख्या में किसानों का बीमा बकाया देखकर अफसरों के भी होश उड़ गए। बताया जाता है कि दिसंबर माह तक केंद्रीय पोर्टल पर बीमित किसानों के नाम दर्ज कराने थे लेकिन, स्थानीय स्तर पर बैंकों ने इसमें जमकर लेटलतीफी की। बैंकों की ओर से यह काम ही दिसंबर महीने में शुरू हुआ। महज एक माह में करीब दो लाख नामों की फीडिंग नहीं हो सकी और इसी बीच पोर्टल बंद हो गया। आधार के मामलों में गड़बड़ी से भी तमाम किसान लाभ से वंचित हो गए। उधर, प्रीमियम देने के बाद बीमा लाभ न मिलने से किसानों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है। अब कृषि अधिकारियों ने दोबारा से पोर्टल खुलवाने के लिए शासन को पत्र भेजा है। जिला कृषि अधिकारी कमलेश सिंह के मुताबिक पोर्टल खुलने पर ही किसानों को मदद मिल सकेगी। इनसेट बीमा कंपनी को मिला 135 करोड़ का प्रीमियम झांसी। खरीफ फसल की बीमा राशि को लेकर पहले से भी विवाद था। शुरुआत में बीमा कंपनी ने सिर्फ 152 करोड़ रुपये ही बीमा क्लेम के तौर पर माना। कंपनी ने मूंगफली समेत कई दलहनी फसल को इसमें शामिल नहीं किया था। इस पर जब बवाल मचा तब जाकर इन सभी को शामिल किया गया। इसके बाद बीमा राशि बढ़कर 209 करोड़ रुपये हो गई। पहली बार बीमा कंपनी को जितना प्रीमियम मिला उससे करीब 75 करोड़ रुपये अधिक भुगतान करना पड़ा। नेशनल बीमा कंपनी को 135 करोड़ ही प्रीमियम के तौर पर मिले थे।